Aurangabad news : एक वर्ष बाद भी काम अधूरा, ग्रामीणों में आक्रोश

Aurangabad news: कैथी नहर से खैरा मोहन तक निर्माणाधीन सड़क बनी परेशानी का सबब, जानेलवा गिट्टी पर चलने को मजबूर ग्रामीण कभी भी कर सकते हैं आंदोलन

गोह. गोह प्रखंड के कैथी नहर से खैरा मोहन तक निर्माणाधीन सड़क ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. शिलान्यास हुए एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. पूरी सड़क पर केवल बड़ी-बड़ी गिट्टियां बिछाकर काम बंद कर दिया गया है, जिसके कारण राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. यह सड़क मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना अंतर्गत प्रस्तावित है. शिलान्यास पट्ट के अनुसार गोह-दाउदनगर मुख्य सड़क से कैथी नहर होते हुए खैरा मोहन तक इस पथ का शिलान्यास 21 नवंबर 2024 को किया गया था. पट्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम अंकित है, जबकि तत्कालीन ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ था. इस दौरान गोह के विधायक भीम कुमार सिंह और एमएलसी दिलीप कुमार सिंह भी मौजूद थे. सड़क निर्माण के लिए छह करोड़ 90 लाख 75 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी है. कुल लंबाई 7.5 किलोमीटर है. शिलान्यास के बाद कुछ दूरी तक गिट्टी बिछाने का कार्य शुरू किया गया, लेकिन जल्द ही काम रोक दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में यह सड़क कीचड़ में बदल जाती है और गर्मी व सर्दी में धूल और गिट्टी से भरी रहती है. इसके कारण दोपहिया व चारपहिया वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है. कई लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं. आपात स्थिति में एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना भी कठिन हो गया है. ग्रामीणों में सड़क की बदहाली को लेकर भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि शिलान्यास के दौरान बड़े-बड़े वादे किये गये थे, लेकिन आज जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है. स्थानीय महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं, बीमारों और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. कई बार रात में मरीजों को चारपाई पर उठाकर कीचड़ और गिट्टी पार करते हुए मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. महिलाओं का कहना है कि सरकार सड़क, तो बनवाना चाहती है, पर काम अधूरा छोड़ देने से लोगों की जान जोखिम में है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य पूरा गति से शुरू नहीं किया गया, तो वे जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आंदोलन करने को बाध्य होंगे. ग्रामीण कार्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं.

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