Aurangabad News : बड़की बेला में विद्यालय के काम को आक्रोशित ग्रामीणों ने कराया बंद

Aurangabad News: निर्माण कार्य में ग्रामीणों ने लगाया अनियमितता बरते जाने का आरोप

औरंगाबाद ग्रामीण. मंगलवार को सदर प्रखंड के बड़की बेला गांव में निर्माणाधीन विद्यालय भवन के निर्माण कार्य में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने हंगामा किया. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में विद्यालय की आवश्यकता को देखते हुए वर्ष 1983 में गांव के ही सामाजिक कार्यकर्ता स्व साधु शरण मेहता ने करीब पांच कट्ठा जमीन दान में दी थी. जमीन दान देने के बाद भी लंबे समय तक वहां विद्यालय का निर्माण नहीं हो सका. कुछ स्थानीय लोगों ने जमीन पर कब्जा कर अतिक्रमण कर लिया. बाद में जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो भूमि की मापी करायी गयी. मापी के दौरान ग्रामीणों और अतिक्रमणकारियों के बीच काफी नोकझोंक भी हुई. काफी मशक्कत के बाद शिक्षा विभाग द्वारा भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गयी और विद्यालय का निर्माण कार्य शुरू कराया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होते ही संवेदक द्वारा गुणवत्ता से समझौता किया जाने लगा. स्थिति यह रही कि भवन निर्माण पूरा भी नहीं हुआ था और रंग-रोगन का कार्य शुरू होने से पहले ही दीवारों का प्लास्टर झड़ने लगा. मंगलवार को उस समय ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया, जब शौचालय निर्माण के दौरान भारी अनियमितता सामने आयी. ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा शौचालय के लिए गड्ढा खोदकर उसमें घटिया सामग्री डाली जा रही थी और बिना मानक के फर्श की ढलाई कराई जा रही थी. सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने यह देखा, उन्होंने तत्काल निर्माण कार्य बंद करा दिया. इस दौरान ग्रामीणों और ठेकेदार के मुंशी के बीच तीखी बहस भी हुई. ग्रामीणों ने खुद फर्श को उखाड़कर दिखाया कि किस तरह नियमों की अनदेखी करते हुए शौचालय का निर्माण कराया जा रहा था. ग्रामीणों के विरोध और दबाव के बाद ठेकेदार ने फर्श को पुनः उखाड़कर दोबारा मजबूती के साथ निर्माण कराने की बात कही और कार्य शुरू कराया. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शिक्षा विभाग के पदाधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं करते और आश्वासन नहीं देते, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे.

क्या है नियम

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार विद्यालय भवन का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के तहत होना अनिवार्य है. भवन की नींव, दीवार, छत, प्लास्टर, फर्श और शौचालय निर्माण में आईएसआई मानक की सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए. शौचालय की टंकी, फर्श और दीवारों में विशेष मजबूती और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि लंबे समय तक भवन सुरक्षित और उपयोगी बना रहे. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,ताकि गांव के बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर सही तरीके से विद्यालय का निर्माण नहीं कराया गया तो आंदोलन किया जायेगा.

क्या कहते हैं ग्रामीणअभय कुमार ने कहा कि विद्यालय के भवन निर्माण के दौरान ठेकेदार कभी निरीक्षण करने नहीं आया. घटिया तरीके से इसका निर्माण कराया जा रहा है, जो नियम के खिलाफ है. हम कोई कमी बर्दाश्त नहीं करेंगे़ ग्रामीण कवि कुमार ने बताया कि भवन बनने के साथ ही कमजोर दिख रहा है. कुछ दिन बाद ही यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह खतरा साबित हो सकता है. गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने तक विरोध करेंगे़ प्रेमकांति देवी ने बताया कि जिस तरीके से अनियमितता बरतकर निर्माण कराया जा रहा है. इससे बच्चों को ही खतरा नही. शिक्षा विभाग पर सवालिया खड़े होते हैं. इस पर जांच के उपरांत कार्रवाई होनी चाहिए. पिंटू कुमार ने कहा कि सोमवार से ही घटिया तरीके से शौचालय का निर्माण कराया जा रहा था. जब विरोध किया तो ठेकेदार का मुंशी गुमराह करने लगा. जब जांच की गयी तो पूरा फर्श ही उखड़ गया है. प्रेमलता देवी ने बताया कि विद्यालय के किसी भी कमरे को नियमानुसार नही बनाया गया है. भवन बनकर तैयार नही हुआ और प्लास्टर उखड़ने लगा. इसकी उच्च स्तरीय जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए. गुड्डू ने बताया कि जब से भवन निर्माण का कार्य शुरू हुआ है तब से एक भी अधिकारी निरीक्षण करने नही आये हैं. ग्रामीणों ने देखा तो विरोध किया. इसके बावजूद मुंशी द्वारा ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है. सावित्री देवी ने बताया कि जैसे-तैसे विद्यालय का निर्माण कराया गया है. दरवाजा छोटा और कमजोर लगाया गया है. खिड़की भी कमजोर है. अगर इसकी जांच हो तो ठेकेदार के काले कारनामों का खुलासा हो जायेगा. भवन निर्माण में लगे मुंशी अरुण कुमार ने बताया कि मजदूरों को बेहतर बनाने का आदेश दिया गया था. जिस समय शौचालय के फर्श की ढलाई की जा रही थी उस समय मौजूद नहीं था. दूसरे साइट पर जेसीबी चल रहा था उसकी देखरेख करने चला गया था. अब ग्रामीणों द्वारा शिकायत मिली तो उसे फिर से उखाड़कर बनाया जा रहा है. वैसे संवेदक का भी पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

क्या कहते हैं डीइओ

जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें ग्रामीणों के हंगामे की जानकारी नहीं है, लेकिन जब मामला संज्ञान में आया है तो इसकी जांच करायी जायेगी. दोषी होंगे तो उनपर कार्रवाई होगी.

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