Auranhabad News : राम आयेंगे तो अंगना सजायेंगे

Aurangabad News: सम्मान समारोह के साथ टंडवा में पुनपुन महोत्सव का हुआ समापन, नदी को बचाने और अतिक्रमण मुक्त करने का आह्वान

नवीनगर. टंडवा पुनपुन नदी तट के समीप कला संस्कृति युवा विभाग बिहार एवं जिला प्रशासन औरंगाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पुनपुन महोत्सव सम्मान समारोह, पुनपुन की महत्ता को दूर-दूर तक फैलाने व नदी को अतिक्रमणमुक्त करने के आह्वान के साथ संपन्न हो गया. दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार गीत से हुआ. महोत्सव का उद्घाटन पूर्व सांसद आनंद मोहन, बीडीओ अरुण कुमार सिंह, पुनपुन महोत्सव समिति अध्यक्ष रामजनम सिंह, सचिव राजेश कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष विजेंद्र चंद्रवंशी, पूर्व जिला पार्षद अनूप ठाकुर, पूर्व मुखिया बिंदेश्वरी सिंह, मुखिया रामप्रसाद राम, पंचायत समिति सदस्य चंदन कुमार, भाजपा नेता राम लखन सिंह, कांग्रेस नेता श्याम बिहारी सिंह, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राजनारायण राय, थानाध्यक्ष अजय बहादुर सिंह, पूर्व प्रमुख संजीव कुमार सिंह, पूर्व उप प्रमुख प्रतिनिधि गुड्डू सिंह, जयेंद्र सिंह द्वारा संयुक्त रूप सें दीप प्रज्ज्वलित व फीता काटकर किया गया. अतिथियों का स्वागत मध्य विद्यालय टंडवा के छात्राओं ने गीत गाकर किया.

नवीनगर अनुमंडल तथा टंडवा व चैनपुर प्रखंड बनेगा : आनंद मोहन

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि उनका टंडवा से दशकों पुराना रिश्ता है. हर घर के आंगन से संबंध है. प्रत्येक गांव और घर घूमने का काम करेंगे. नवीनगर अनुमंडल तथा टंडवा और चैनपुर प्रखंड बनेगा. अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ता है. दोनों एनटीपीसी का सीएसआर फंड से नवीनगर का विकास किया जायेगा. बिजली परियोजना का नुकसान यहां के लोग झेलेंगे और नौकरी दूसरे लोगों को मिल रहा है. यह अब नहीं होगा. नदियों को मां का दर्जा दिया गया है. पुनपुन का मतलब पुनः आइए होता है. पुनपुन के पितरों का कर्तव्य बनता है कि इसको अतिक्रमणमुक्त किया जाये. एक दिन नवीनगर, टंडवा और बारुण बंद किया जायेगा जो ऐतिहासिक बंदी होगा. तभी पुनपुन नदी का जीर्णोद्धार होगा और नवीनगर अनुमंडल बनेगा. एनटीपीसी सीएसआर फंड से विकास होगा तथा लोगों को नौकरी मिलेगी. पुनपुन महोत्सव की राशि दो लाख की जगह पांच लाख रुपये करने की बात भी उठायी.

पुनपुन के अस्तित्व को बचाने की अपील

भाजपा के वरिष्ठ नेता राम लखन सिंह ने कहा कि पुनपुन नदी का अस्तित्व खतरे में है. इसलिए महोत्सव मनाने से पहले इसे अतिक्रमण मुक्त करना होगा तभी महोत्सव की सार्थकता सिद्ध होगी. पुनपुन नदी में श्राद्ध के बिना श्राद्ध सफल नहीं हो सकता है. कई जगहों पर तो नदी का अस्तित्व ही खत्म हो गया है. नदी नाला के रूप में बदल गया है. इसे अतिक्रमण मुक्त करने की आवश्यकता है. भाजपा के जिलाध्यक्ष विजेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि बाहरी कलाकारों की जगह स्थानीय कलाकारों को मौका मिलना चाहिए, तभी स्थानीय कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा. इस नदी के तट पर छठ मनाया जाता है. पुनपुन नदी पवित्र नदी है जिसकी साफ-सफाई और अतिक्रमण मुक्त कराने की आवश्यकता है. पूर्व प्रमुख संजीव सिंह ने कहा कि पुनपुन नदी का भागीरथी प्रयास करने की जरूरत है. पुनपुन महोत्सव सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि नदी के जीर्णोद्धार करने की जरूरत है. सोन नदी का पानी पुनपुन नदी में गिराया जाना चाहिए जिससे किसानों को खेती में सुविधा होगी.

तिरंगा ऊंचा रहेगा.. भारत मेरा नहीं झुकेगा की प्रस्तुति पर दर्शकों ने खड़े होकर बजायीं तालियां

महोत्सव के अंतिम दिन कलाकारों ने गीत-संगीत से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. नाटक के माध्यम से देश के सेनाओं के शौर्य को सलाम किया. तिरंगे के साथ बच्चों ने झांकी प्रस्तुत कर लोगों को मनमुग्ध कर दिया. तिरंगा ऊंचा रहेगा.. भारत मेरा नहीं झुकेगा की प्रस्तुति पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजायी. सबसे अधिक आकर्षण के केंद्र में पहलगाम अटैक पर नाटक रहा. नाटक के माध्यम से बताया गया कि कैसे देश के जवानों ने ऑपरेशन सिंदूर से आतंकवादियों के मंसूबे ध्वस्त किये. छोटी बच्ची काव्या गोस्वामी ने नृत्य की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया. तान्या मौवार ने राम आयेंगे तो अंगना सजायेंगे की प्रस्तुति दी. आषी कुमारी, रिचा कुमारी, कंचन कुमारी के साथ-साथ क्षेत्रिय कलाकारों द्वारा गीत-संगीत की प्रस्तुति दी. अंत में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. मौके पर शिक्षक धनंजय सिंह, विनोद दास, रामविजय सिंह, चुन्नू सिंह, संजीव सिंह, प्रमेंद्र सिंह, विकास सिंह आदि लोग मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By AMIT KUMAR SINGH_PT

AMIT KUMAR SINGH_PT is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >