Aurangabad news. …तो किसान नहीं देंगे जमीन

Aurangabad news. वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की समस्या सुलझने के बजाय दिन-ब-दिन उलझती जा रही है. एक तरफ प्रशासन कार्य को तेजी से करने के प्रयास में जुटा है.

अंबा. वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की समस्या सुलझने के बजाय दिन-ब-दिन उलझती जा रही है. एक तरफ प्रशासन कार्य को तेजी से करने के प्रयास में जुटा है. प्रशासन की ओर से इसके लिए पंचायत एवं गांव स्तर पर कैंप लगाया जा रहा है, इसके साथ ही पुलिस बल की मौजूदगी में कार्य कराने का प्रयास किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसान एकजुट होने लगे हैं. हालांकि, निर्माण के लिए प्रस्ताव आने के तुरंत बाद किसान संघर्ष समिति का गठन कर किसानों ने अपनी बात को अधिकारियों के समक्ष रखा था, परंतु समस्या का निराकरण नहीं होने से अब धीरे-धीरे किसानों की एकजुटता बढ़ती जा रही है. मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर चले अंचल कार्यालय के समक्ष आयोजित धरने में सैकड़ों की संख्या में किसान शामिल हुए. किसान कामता प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन किसान यूनियन के जिला प्रभारी विकास सिंह ने किया.

अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाया सवाल

धरने के माध्यम से किसानों ने सरकार की नीति एवं अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न उठाया. कहा कि कृषि हम सबकी आजीविका का मुख्य साधन है. सड़क निर्माण के लिए कई ऐसे किसानों की भूमि अधिग्रहित की गयी है, जिनके पास अतिरिक्त भूमि नहीं है. ऐसे में राशि कम मिलने से वह दूसरी जगह जमीन भी नहीं खरीद सकते हैं. ऐसे में दर्जनों किसान भूमिहीन हो जायेंगे. किसान यूनियन के जिला संयोजक वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने कहा कि हम सभी को जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि इसी अंचल में संडा- महाराजगंज से रांची फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान वहां के प्रभावित किसानों को 30 हजार 620 रुपये प्रति डिसमिल की दर से ब्याज सहित चार गुनी मुआवजा राशि दी जाती है, जबकि ठीक उसकी बगल में एक ही जिला और एक ही अंचल होने के बावजूद भारतमाला परियोजना में हमारे जमीनों का दर मात्र आठ हजार रुपये प्रति डिसमिल तय की गयी है, जो सरासर अन्याय है. मौके पर किसान जयराम सिंह, कृष्णानंद पांडेय, विनय सिंह, बिजेंद्र मेहता, विक्की सिंह, वीरेंद्र पांडेय, शंकर पांडेय, गया पांडेय, बलराम सिंह, महिला किसान सुधा सुमन आदि थे.

निबंधन नियमावली व कमिश्नर के निर्देशों की हो रही अनदेखी

किसान राजकुमार सिंह ने कहा कि अधिकारी हम सभी किसानों से जबरन जमीन लेना चाह रहे हैं, जो उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि मुआवजा तय करने में अधिकारियों द्वारा बिहार निबंधन नियमावली एवं गया कमिश्नर के निर्देश की अनदेखी की जा रही है. कई किसानों द्वारा कमिश्नर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था. कमिश्नर द्वारा उचित मुआवजा देने का निर्देश प्राप्त है. इसके साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री करते समय निबंधन कानून का हवाला देकर गांव या किसी सड़क से 200 मीटर की दूरी में आने वाली भूमि या छह डिसमिल से कम रकबा वाली भूमि को आवासीय भूमि मानकर निबंधन शुल्क ली जाती है. किसानों द्वारा आवासीय या व्यावसायिक भूमि का निबंधन शुल्क नहीं दिये जाने पर जुर्माने की वसूली की जाती है. इधर, भूमि अधिग्रहण के दौरान निबंधन कानून को ताक पर रखकर आवासीय व व्यावसायिक भूमि का मुआवजा भीठ, धनहर प्रकृति बताया जा हा है, जो सरासर अन्याय है.

अंबा-देव रोड चौड़ीकरण के दौरान अधिग्रहित भूमि का अब तक नहीं मिला मुआवजा

अंबा से देव तक हुए सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित किसानों ने भी धरो में हिस्सा लिया. ढोंगरा गांव के प्रभावित किसान संतन सिंह ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान हमारी जमीन जिला प्रशासन द्वारा प्रलोभन देकर ले ली गयी. अधिग्रहित जमीन पर सड़क का निर्माण भी हो गया, परंतु अब तक अधिकतर किसानों को मुआवजे का नोटिस नहीं दिया गया है. धरने को संबोधित करते हुए सोनबरसा गांव के सेवानिवृत्त सैनिक किसान नरेंद्र राय ने अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर धरने में जमकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सभी राजस्व कर्मचारी द्वारा बिचौलिया को रखा गया है. जिनके माध्यम से पैसों की अवैध वसूली की जा रही है. उन्होंने मुआवजा देने की नियमावली में संशोधन करने और राजस्व कर्मचारी को कार्य में सुधार करने की मांग की. कहा कि यदि अंचल कार्यालय में सही तरीके से कार्य नहीं किया जाता है, तो इसका खमियाजा सरकार को चुनाव में भुगतना पड़ेगा. धरने के दौरान किसानों ने जिलाधिकारी के नाम लिखित मांग पत्र अंचल अधिकारी को सौंपने की बात बतायी है. इस संबंध में अंचल अधिकारी चंद्र प्रकाश से पूछने पर बताया कि मामले से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा. उनके निर्देश के आलोक में ही कार्रवाई की जायेगी.

ये हैं किसानों की मांगें

भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण में मुआवजे की राशि कमिश्नर द्वारा तय दर के अनुरूप सभी किसानों को दी जाये. निबंधन कानून के तहत आवासीय और व्यावसायिक प्रकृति की भूमि का मुआवजा आवासीय और व्यावसायिक के दर से दिया जाये. अंबा से देव रोड में हुए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा आवासीय और व्यावसायिक दर से दिया जाये. परिमार्जन प्लस में किसानों के साथ आ रही समस्या को जल्द से जल्द निराकरण किया जाये. हलका कर्मचारियों द्वारा स्थानीय दलाल रखकर किसानों से की जा रही अवैध वसूली पर तत्काल लगाम लगे. गैरमजरुआ व बाकाश्त मालिक भूमि का रैयतीकरण जल्द से जल्द किया जाये. भारतमाला परियोजना के तहत हो रहे निर्माण में बिना मुआवजा दिये बलपूर्वक निर्माण कार्य नहीं कराया जाये आदि.

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Published by: Jitendra kumar

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