Auranhabad News : खंडहर बना स्टेडियम, जगह तलाश रहीं प्रतिभाएं

Aurangabad News: खेल प्रतिभाएं उभरने के बजाय धीरे-धीरे दम तोड़ती नजर आ रही

दाउदनगर. दाउदनगर शहर में बच्चों और युवाओं के लिए खेल का समुचित मैदान सपना बना हुआ है. देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चे तंग मुहल्लों, संकरी गलियों और सड़कों पर खेलकर अपना हुनर निखारने को मजबूर हैं. शहर में कुछ स्कूलों के पास खेल मैदान जरूर हैं, लेकिन उनकी न तो उचित देख-रेख होती है और न ही उन्हें व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया है. परिणामस्वरूप खेल प्रतिभाएं उभरने के बजाय धीरे-धीरे दम तोड़ती नजर आ रही हैं.

खिलाड़ियों के अभ्यास की जगह मवेशी कर रहे विचरण

दाउदनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय इंटर स्कूल परिसर में बना स्टेडियम इस बदहाली का सबसे बड़ा उदाहरण है. करीब 14 वर्ष पहले लाखों रुपये की लागत से बना यह स्टेडियम आज पूरी तरह जर्जर स्थिति में है. रखरखाव के अभाव में स्टेडियम का अधिकांश हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है. परिसर में बने कमरे, कीवाड़ और खिड़कियां गायब हो चुकी हैं. सीढ़ियां टूट रही हैं, चहारदीवारी कई जगहों से ध्वस्त है और मुख्य गेट भी टूटा हुआ है. हालात ऐसे हैं कि जहां कभी खिलाड़ियों के अभ्यास की गूंज होनी चाहिए थी, वहां आज मवेशी खुलेआम विचरण करते नजर आते हैं. राष्ट्रीय इंटर स्कूल के पूर्व प्रधानाध्यापक कृष्णा सिंह ने बताया कि वर्ष 2011-12 में लगभग 42 लाख रुपये की लागत से इस स्टेडियम का निर्माण कराया गया था. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे खेलकूद गतिविधियों के लिए समर्पित कर दिया गया था. शुरुआती कुछ वर्षों तक विद्यालय स्तर पर खेलकूद गतिविधियां संचालित हुईं और एक बार जिला स्तरीय आयोजन भी हुआ, लेकिन इसके बाद न तो कोई बड़ा अधिकृत आयोजन हुआ और न ही देख-रेख की व्यवस्था बनी. 2016 के बाद स्थिति और अधिक खराब होती चली गई. समय पर मरम्मत और रखरखाव न होने से स्टेडियम जर्जर हो गया. आज हालात यह हैं कि लाखों की लागत से बना यह खेल परिसर खंडहर में तब्दील हो रहा है.

अशोक इंटर स्कूल का मैदान बना युवाओं के अभ्यास का केंद्र

अशोक इंटर स्कूल का खेल मैदान भी युवाओं और बच्चों के अभ्यास का केंद्र है, लेकिन वहां भी देख-रेख का घोर अभाव है. इसी तरह शहर के अन्य स्कूलों के मैदानों में युवा खेलकूद के साथ-साथ पुलिस और सेना में भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ का अभ्यास करते हैं, लेकिन इन मैदानों को व्यवस्थित नहीं कहा जा सकता. यदि कोई स्थान व्यवस्थित खेल गतिविधियों के लिए उपयुक्त हो सकता था, तो वह राष्ट्रीय स्कूल स्टेडियम था, लेकिन दुर्भाग्यवश इसका लाभ न खिलाड़ियों को मिल पा रहा है और न ही आम नागरिकों को. स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडल मुख्यालय में स्टेडियम का होना गौरव की बात होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता ने इसे बदहाली के कगार पर पहुंचा दिया है. न तो इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस पहल की गयी और न ही यहां नियमित खेल आयोजनों की व्यवस्था की गयी. परिणामस्वरूप यह स्टेडियम धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. स्थानीय खेलप्रेमियों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टेडियम का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाये और इसे आम लोगों व खिलाड़ियों के लिए खोला जाये. यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो दाउदनगर की खेल प्रतिभाएं मैदान के अभाव में यूं ही गलियों और सड़कों तक सिमट कर रह जायेंगी.

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By AMIT KUMAR SINGH_PT

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