गोह. आदर्श समाज, समानता और सिद्धांतवादी राजनीति के लिए शहीद हुए महान समाजवादी नेता रामरूप मेहता की शहादत आज भी समाज को सही दिशा दिखा रही है. सांप्रदायिकता, जातिवाद और सिद्धांतविहीन राजनीति के दौर में उनके विचार प्रकाश स्तंभ की तरह मार्गदर्शन कर रहे हैं. यह बातें मगध विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो दीपक कुमार ने हसपुरा में आयोजित 46वें रामरूप मेहता महोत्सव का उद्घाटन करते हुए कहीं. प्रो दीपक कुमार ने कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या की जा सकती है, लेकिन उसके विचारों को गोलियों से नहीं मारा जा सकता. शहादत के साढ़े चार दशक बाद भी 50 से 60 हजार लोगों की उपस्थिति यह साबित करती है कि रामरूप मेहता आज भी जनमानस के दिलों में जीवित हैं.
विचारों को नहीं मार सकती गोलियां
प्रो कुमार ने कहा कि रामरूप मेहता ने समाजवाद को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीन पर उतारने का काम किया. यही कारण है कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और नयी पीढ़ी को प्रेरणा दे रहे है. कार्यक्रम की अध्यक्षता और आयोजन की संयोजक समाजसेवी सुषमा देवी उर्फ सुषमा पांडेय ने की. उन्होंने कहा कि रामरूप मेहता केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे. उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के गरीबों, किसानों और शोषितों की आवाज बुलंद की. सुषमा पांडेय ने कहा कि यह महोत्सव केवल स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि नयी पीढ़ी को समाजवादी मूल्यों से जोड़ने का मंच है. उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, पुलिस और हजारों दर्शकों के प्रति आभार जताया.
बिहार से बाहर तक बढ़ी महोत्सव की ख्याति
वरिष्ठ पत्रकार उज्ज्वल कुमार ने कहा कि सुदूर ग्रामीण इलाके में हर साल 50 से 60 हजार लोगों का जुटना अपने आप में ऐतिहासिक है. अब इस महोत्सव की पहचान बिहार की सीमाओं से बाहर भी बन चुकी है. पर्यटन विभाग के पीआरओ रविशंकर उपाध्याय और दाउदनगर एसडीओ अमित राजन ने भी शहीद नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 45 वर्षों से निरंतर आयोजन अपने आप में एक मिसाल है.
मैदान छोटा पड़ा, दर्शक दीर्घा का बढ़ाना पड़ा दायरा
महोत्सव में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजकों को दर्शक दीर्घा का दायरा बढ़ाना पड़ा. समारोह को जिप सदस्य प्रतिनिधि एकलाख खां, सर्वोदय मेहता, अरविंद वर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया. इस अवसर पर सर्किल इंस्पेक्टर सुनील कुमार, हसपुरा थाना के रवी कुमार मंडल, गोह थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह, उपहारा थानाध्यक्ष आकाश कुमार और बंदेया थानाध्यक्ष सूरज कुमार को स्मृति चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया.
बेतिया की बेटियों ने मारी बाजी
महोत्सव का मुख्य आकर्षण महिला फुटबॉल प्रतियोगिता रही. फाइनल मुकाबले में बेतिया की टीम ने मुजफ्फरपुर को 1-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया. मैच के पहले हाफ के 40वें मिनट में बेतिया की काजल ने तानुशा के पास पर शानदार गोल दागा. मुजफ्फरपुर की टीम ने बराबरी के कई प्रयास किए, लेकिन बेतिया की गोलकीपर खुशबू ने सभी हमलों को विफल कर दिया. प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार काजल को दिया गया. रेफरी की भूमिका गुदरी शर्मा ने निभायी. खिलाड़ियों ने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ के सामने खेलना उनके लिए यादगार अनुभव रहा.
कौन थे रामरूप मेहता
महोत्सव प्रत्येक वर्ष समाजवादी नेता शहीद रामरूप मेहता की जयंती पर आयोजित किया जाता है. रामरूप मेहता का जन्म दो जनवरी 1936 को हसपुरा प्रखंड के बिरहारा गांव में हुआ था. छात्र जीवन में वे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े, इसके बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ सर्वोदय आंदोलन में सक्रिय रहे. बाद में डॉ राममनोहर लोहिया के संपर्क में आने के बाद उन्होंने समाजवादी राजनीति का नेतृत्व किया. उनकी बढ़ती लोकप्रियता असामाजिक तत्वों को खटकने लगी और अंततः 16 मार्च 1980 को उनकी हत्या कर दी गयी. पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की प्रेरणा से वर्ष 1981 से लगातार यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है. आयोजन की सफलता में सर्वोदय डिग्री कॉलेज के शिक्षकों और छात्रों की भूमिका सराहनीय रही.
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