औरंगाबाद शहर.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अंतर्गत बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना के कार्यान्वयन के लिए पैनल अधिवक्ताओं तथा पारा विधिक स्वयं सेवकों से संबंधित गठित कानूनी सेवा इकाई के सदस्यों का दो दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम का समापन गुरुवार को हो गया. अभिविन्यास के अंतिम सत्र में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो लक्ष्मीकांत मिश्रा द्वारा पॉक्सो अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गयी. कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का उल्लेख है, जिसमें बच्चों के हित के लिए राज्य द्वारा विशेष प्रबंध किये जाने का प्रावधान है. इसके साथ-साथ अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत भी मौलिक अधिकार में रखा गया है और इसी बात को यूनाईटेड नेशन के 1992 में हुए कंवेशन में बच्चों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए राज्यों को सर्वोपरि उद्देश्य बताया गया है. इसमें लगभग सभी देशों द्वारा प्रबंध किये जाने की सहमति प्रदान की गयी थी. इसके साथ-साथ देश में निर्भया कांड के बाद आपराधिक कानूनों में कई परिवर्तन किये गये एवं बच्चों से संबंधित होने वाले अपराधों के प्रति गंभीर एवं कठोर दंड का प्रावधान किया गया जिसका उदाहरण के रूप में पॉक्सो अधिनियम लिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि बच्चों के विरूद्ध यौन हिंसा में बच्चों की उम्र के अनुसार दंड का प्रावधान किया गया है जिसे तीन भागों में बांटा गया है. पहले भाग में 12 साल के बच्चों के विरुद्ध हुए अपराध के लिए दंड का प्रावधान अत्यधिक कठोर बनाया गया है. उसके बाद 12 से 16 वर्ष के बच्चों के विरूद्ध हुए अपराध के लिए दंड का प्रावधान है. इसके बाद 16 से 18 वर्ष के बच्चों के विरुद्ध हुए यौन अपराधों के विरुद्ध दंड का प्रावधान किया गया है. न्यायालय उक्त अधिनियम में अपराधी को दंड देते समय पीड़ित एवं पीड़िता की उम्र को देखते हुए दंड का निर्धारण करता है. इसके अतिरिक्त पॉक्सो जज द्वारा बताया गया कि अन्य आपराधिक कानूनों से अलग पॉक्सो अधिनियम है जिसमें अपराधी अथवा बचाव पक्ष पर यह दायित्व होता है कि उसने अपराध नहीं किया है और वह साबित करें. जबकि अन्य अपराधिक कानूनों में अभियोजन को साबित करना होता है कि बचाव पक्ष के द्वारा अपराध किया गया है. इसके अतिरिक्त पॉक्सो जज ने बच्चों से जुड़े कई प्रावधानों के बारे में उपस्थित लोगों को अवगत कराते हुए कहा कि जितनी जानकारी आपको उपलब्ध करायी गयी है वह समाज को बच्चों के विरूद्ध यौन हिंसा को रोकने में समाज को जागरूक करें. अगर बच्चों के विरुद्ध यौन हिंसा की जानकारी प्राप्त हो तो इसकी शिकायत अवश्य करें. बाल अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना, 2024 के कार्यान्वयन के लिए पैनल अधिवक्ताओं तथा पारा विधिक स्वयं सेवकों से संबंधित गठित कानूनी सेवा इकाई के सदस्यों का दो दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम का जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सुकुल राम के संबोधन के पश्चात समापन किया गया. कहा कि इन दो दिनों में जितने विषेषज्ञों द्वारा अलग-अलग विषय पर आपको जानकारी उपलब्ध करायी गयी है यह जानकारी आपको समाज के हित के लिए उपयोग करना चाहिए ताकि एक अपराध मुक्त समाज निर्माण का आप स्वयं वाहक बन सकें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
