दाउदनगर. दिशा बौद्धिक मंच के तत्वावधान में क्षेत्र के मूर्धन्य चिकित्सक एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ सुरेश प्रसाद की पुण्यतिथि के अवसर पर एक शिक्षण संस्थान परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस सभा में नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, रंगकर्मियों और साहित्यकारों ने एक स्वर में डॉ सुरेश प्रसाद के योगदान को दाउदनगर के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया. उनके तैलचित्र पर उपस्थित नागरिकों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गयी. अवकाश प्राप्त बैंक प्रबंधक राजेंद्र चौधरी ने कहा कि वे 11 उच्च डिग्रियों से विभूषित थे. उस दौर में जब इतने उच्च शिक्षित चिकित्सक बड़े महानगरों की ओर पलायन कर रहे थे, तो उन्होंने दाउदनगर जैसे क्षेत्र में रहकर चिकित्सा सेवा को अपना धर्म बनाया. सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक शिवशंकर प्रसाद ने कहा उनका व्यक्तित्व अत्यंत चुंबकीय था. उनकी सटीक दवा और आत्मीय व्यवहार रोगी को मानसिक रूप से आधा स्वस्थ कर देता था. ममतेश ने अपना अनुभव साझा किया. शमशेर नगर हाइ स्कूल के संगीत शिक्षक वेंकटेश पांडेय ने डॉ साहब की कालजयी कृति चाय महाकाव्य की सप्रसंग व्याख्या की. उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ केवल कविता नहीं, बल्कि विज्ञान और साहित्य का अद्भुत समन्वय है. इस महाकाव्य की आभा ऐसी थी कि डॉ हरिवंशराय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, शंकरदयाल सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और जानकी वल्लभ शास्त्री जैसे विश्वस्तरीय साहित्यकारों ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की है. उनकी लगभग 80 प्रकाशित पुस्तकें उनकी अनवरत लेखनी का प्रमाण हैं. वरिष्ठ रंगकर्मी ब्रजेश कुमार और अवकाश प्राप्त अनुमंडल कृषि पदाधिकारी द्वारिका प्रसाद ने उनके कला-प्रेम को रेखांकित करते हुए कहा कि वे आर्य कला परिषद जैसी प्रतिष्ठित नाट्य संस्था के संस्थापक थे. वार्ड पार्षद दिनेश कुमार, शिक्षक संजय कुमार आदि उपस्थित थे. डॉ विश्वकांत पांडेय, डॉ विजय कुमार, संदीप कुमार व वार्ड पार्षद राधारमण पुरी सहित अन्य लोगों ने डॉ सुरेश प्रसाद के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
