Aurangabad News(अंबुज पांडेय): औरंगाबाद में कुटुंबा-टंडवा मुख्य मार्ग स्थित महुआधाम के पास उतर कोयल नहर परियोजना के अंतर्गत बन रहे पुल निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए वर्मा पंचायत के ग्रामीणों ने निर्माण कार्य बंद करा दिया. आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में तकनीकी गड़बड़ी की गई है, जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों का आवागमन जोखिम भरा बन गया है.
आवागमन की गंभीर समस्या
ग्रामीणों के अनुसार पुल का निर्माण सीधा कराने के बजाय तिरछा कर दिया गया है, जबकि इसकी ऊंचाई भी आवश्यकता से अधिक रखी गई है. इतना ही नहीं, एप्रोच रोड का समुचित निर्माण किए बिना ही पुल को आवागमन के लिए खोल दिया गया. दूसरी ओर पुराने पुल को भी तोड़ दिया गया है, जिससे लोगों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की ऊंचाई और ढलान इतनी अधिक है कि वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को प्रतिदिन परेशानी झेलनी पड़ रही है. ग्रामीणों के अनुसार अब तक दर्जनों लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं.
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से नाराज होकर वर्मा पंचायत के उरदाना, बहुआरा, भेड़िया, मीरपुर, लखना, मोजहिदा और वर्मा समेत आसपास के कई गांवों के लोग निर्माण स्थल पर पहुंच गए और कार्य बंद कराया. इस दौरान पूर्व पंचायत समिति सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, पूर्व पैक्स अध्यक्ष सुबोध साव, अभिषेक सिंह दुर्गेश, कमल विश्वकर्मा, यूनिश खान, अशोक मिश्रा, अरविंद गुप्ता, चंदन यादव, अजीत यादव, मंगेश्वर सिंह, सुरेंद्र सिंह चंद्रवंशी, जनेश्वर सिंह, कृपाल सिंह, अर्जुन सिंह, उपेंद्र सिंह, पवन सिंह, सुदाम सिंह, राहुल सिंह, बब्लू खान, धर्मेंद्र राम, सनोज राम, गुलशन सिंह, लक्की सिंह, गोविंद मेहता, महेंद्र मेहता समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पुल “भ्रष्ट अधिकारियों की भेंट चढ़ गया” है. यदि निर्माण में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे. ग्रामीणों ने प्रशासन से तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
सामने घर होने के कारण बदला गया पुल का डिजाइन
जानकारी के अनुसार, इस पुल से आसपास के दर्जनों गांवों का आवागमन होता है. बताया जाता है कि पुल के पास एक व्यक्ति द्वारा घर निर्माण कर लिया गया है. इसी कारण पुल को सीधा बनाने के बजाय तिरछा कर दिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने स्थानीय परिस्थितियों और जनसुविधा की अनदेखी कर निर्माण कराया, जिससे समस्या और बढ़ गई. वहीं पुल तिरछा किए जाने के बाद एप्रोच रोड निर्माण में भी दिक्कतें सामने आने लगीं, क्योंकि आसपास की जमीन निजी स्वामित्व वाली बताई जा रही है. ऐसे में सड़क का समुचित जुड़ाव नहीं हो सका और पुल अधूरा रहते हुए भी चालू कर दिया गया.
अधिकारियों ने दिया सुधार का आश्वासन
ग्रामीणों द्वारा कार्य बंद कराए जाने की सूचना मिलने पर अंचल अधिकारी चंद्रप्रकाश एवं वाप्कोस के अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और जल्द ही निर्माण कार्य की समीक्षा कर आवश्यक सुधार कराने का आश्वासन दिया. हालांकि ग्रामीण अधिकारियों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और पहले तकनीकी त्रुटियों को ठीक करने की मांग पर अड़े रहे. फिलहाल ग्रामीणों के विरोध के बाद निर्माण कार्य स्थगित कर दिया गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुल को सुरक्षित और मानक के अनुरूप नहीं बनाया जाएगा, तब तक वे निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे. इस संबंध में वह आपको उसके अभियंता आरके सिंह से कुछ जाने पर बताया कि पुल के पास एप्रोच रोड का निर्माण करा कर उसे ठीक करा दिया जाएगा.
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