दाउदनगर.
दाउदनगर महाविद्यालय के प्रेमचंद सभागार में आइक्यूएसी एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी साहित्य में पर्यावरण विमर्श पर सेमिनार का आयोजन किया गया. अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो डॉ एमएस इस्लाम ने कहा कि पर्यावरण आमतौर पर विज्ञान का विषय है, जिसे वनस्पति शास्त्र, जन्तु विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, रसायन शास्त्र एवं भूगोल जैसे विज्ञान के विषयों द्वारा पढ़ाया एवं शोध किया जाता है, परंतु प्रो आकाश कुमार ने पर्यावरण को हिंदी साहित्य से जोड़ कर एक नये आयाम की शुरुआत की है. हिंदी साहित्य में लेखों, कविताओं व निबंधों में पर्यावरणीय चेतना एवं विमर्श को रेखांकित करने से आने वाले समय में न केवल एक नये विषय का आरंभ होगा अपितु विद्यार्थियों को लाभ पहुंचेगा. मुख्य वक्ता के तौर पर हिंदी के सहायक प्राध्यापक आकाश कुमार ने वर्तमान समय में पर्यावरण पर मंडराते संकट को संक्षेप में प्रस्तुत किया. उन्होंने हिंदी साहित्य में पर्यावरण को लेकर जारी विमर्श का परिचय दिया और बताया कि चूंकि साहित्य अपने वक्त की समस्याओं को दर्ज करने का काम करता है, इसलिए पर्यावरण संकट पर भी हिंदी में लगातार सृजन हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि साहित्य उसी तरह पर्यावरण संरक्षण की बात नहीं करता जैसे विज्ञान करता है. साहित्य में पर्यावरण को बचाने का मतलब इंसानों को, इंसानी संबंधों को, सभ्यता को और मानवीय मूल्यों को भी बचाना है.उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण को लेकर लिखे जा रहे उपन्यास, कहानी और कविताओं का परिचय दिया. नरेश सक्सेना, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, जसिंता केरकेट्टा, निर्मला पुतुल, जयश्री राय, प्रदीप जिलवाने, एस आर हरनोट आदि रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया और बताया कि इनकी रचनाओं का पाठ किया और कहा कि इनकी रचनाओं में पर्यावरण और मानवीय सभ्यता के मूल्य मौजूद हैं. हिंदी का पर्यावरण केंद्रित साहित्य विकास की मौजूदा अवधारणा पर सवाल खड़ा करते हुए जल, जंगल और जमीन की बात करता है. संचालन हिंदी के सहायक प्राध्यापक प्रो मंजू कुमार सोरेन तथा धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ बरुण कुमार चौबे ने दिया. मौके पर कॉलेज के पीआरओ डॉ देव प्रकाश समेत कॉलेज के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी व विद्यार्थी उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
