पहले से कटी थी खिड़की की रॉड

औरंगाबाद (कोर्ट) : कोर्ट हाजत की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए शनिवार को कैदियों के फरार होने की घटना कोई पहली नहीं है. इस हाजत की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा हमेशा कैदी उठाते हैं. पहले भी इस हाजत से कई कैदी फरार हुए हैं, जिन्हें पुलिस कर्मियों द्वारा खदेड़ कर पकड़ा गया […]

औरंगाबाद (कोर्ट) : कोर्ट हाजत की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए शनिवार को कैदियों के फरार होने की घटना कोई पहली नहीं है. इस हाजत की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा हमेशा कैदी उठाते हैं. पहले भी इस हाजत से कई कैदी फरार हुए हैं, जिन्हें पुलिस कर्मियों द्वारा खदेड़ कर पकड़ा गया था. चार वर्ष पहले उमाकांत दुबे हाजत की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों पर मिर्च पाउडर फेंक कर तीन साथियों के साथ फरार हो हो गया था. स्थानीय लोगों व पुलिस कर्मियों ने पीछा कर पकड़ा था. फिर भी दो कैदी बम फेंक कर भागने में सफल हुए थे.

इसके बाद भी कोर्ट हाजत की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस पदाधिकारियों द्वारा नहीं बढ़ायी गयी. यही कारण है कि कैदी हमेशा इस हाजत की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर मानते हैं और यहां से भागना आसान समझते हैं. जिस खिड़की में लगी रॉड को काट कर छह कैदी भागे, वह रॉड शनिवार को भागने के समय नहीं बल्कि पहले ही काटी गयी थी, जैसा कि पुलिस कर्मियों व हाजत में बंद अन्य कैदियों ने बताया. हाजत में बंद कैदियों का कहना था कि जैसे ही कैदियों को हाजत में लाया गया. सभी 42 कैदी आपस में फरार होने की योजना बना रहे थे. सभी छह कैदियों ने एक साथ मिल कर रॉड को ऊपर की ओर मोड़ दिया और भाग निकले.

रहती है काफी भीड़ : जिस स्थान पर कोर्ट हाजत है, वहां पूरे दिन काफी भीड़ लगी रहती है. इसके कारण यह काफी असुरक्षित हो जाता है. इसके अलावा हाजत के उतरी-पूर्वी व दक्षिणी भाग में काफी दुकानें हैं. इससे पूरे दिन भीड़ लगी रहती है. यही नहीं सामने में जिला निबंधन कार्यालय है, जिसके कारण लोगों का आना-जाना लगा रहता है. यही कारण है कि कैदी भीड़ का फायदा उठा कर भागने में सफल हो जाते हैं. शनिवार को जिस दिशा की ओर से कैदी चहार दीवारी फांद कर भागे, उसमें हाजत के पिछली भाग में लगी गुमटी व बने दुकान ने काफी साथ दिया.

हुआ यह कि कैदी खिड़की के सहारे हाजत से निकल गये, लेकिन चहारदीवारी पर चढ़ कर कूदने की साहस नहीं कर सके. पर, चहारदीवारी से सटे दीवार में उन दुकानों की छत थी, जिसपर वे चढ़ गये और आराम से जेल रोड में उतर कर भाग गये. यही नहीं जब कैदी भाग रहे थे तो दुकानदारों ने न तो विरोध किया और न ही पीछा.

श्रीराम की किस्मत ने छोड़ा साथ : कोर्ट हाजत से पांच कैदी तो खिड़की के सहारे निकल कर इधर-उधर भाग निकले, लेकिन सबसे अंत में छठे कैदी के रूप में टंडवा थाना क्षेत्र के रहने वाला श्रीराम रजवार भागने के लिए खिड़की से निकल कर चहारदीवारी पर चढ़ कर दुकान की छत के सहारे कूदने लगा, तो वहां खड़े आसपास के लोग उसे देख कर चिल्लाने लगे. शोर सुन कोर्ट हाजत की पुलिस वहां पहुंची, और उसे पकड़ लिया.

जेल के गार्ड ने दिखायी तत्परता : जैसे ही कोर्ट हाजत से निकल कर मदरसा रोड की ओर भाग रहे कै दी राकेश गिरी व पप्पू सिंह को पकड़ने के लिए जेल गेट पर खड़े गार्ड नहीं पीछा करते तो ये दोनों कैदी भागने में सफल हो जाते. लेकिन जैसे ही दो कैदी जेल के सामने से दौड़ते हुए भागे, तो बिना किसी को कहे जेल गार्ड पीछा करना शुरू कर दिया. मदरसा इसलामिया के समीप दोनों को पकड़ लिया. प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो दोनों कैदी व पुलिस कर्मी के बीच काफी उठा-पटक हुई. इससे दो पुलिस कर्मियों को हल्की चोट भी आयी.

लूटकांड के आरोपित हैं पांच कैदी : पुलिस पदाधिकारियों की मानें तो कोर्ट हाजत से फरार होने वालों में राकेश गिरी, राकेश गुप्ता निवासी शाहपुर थाना नगर, अमित शर्मा निवासी मोव टेकारी, अरविंद सिंह निवासी अमिलौना थाना जम्होर व पप्पू सिंह औरंगाबाद मदनपुर थाना क्षेत्र के खेसर गांव के समीप मध्य बिहार ग्रामीण बैंक के कैश वैन से लूटे गये 43 लाख रुपये कांड में जेल में बंद थे. वहीं श्रीराम रजवार नक्सली कांड में सजा काट रहा है. यही कारण रहा कि ये सभी कैदी एक योजनाबद्ध तरीके से जेल से भागने की योजना बनायी.

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