औरंगाबाद (कोर्ट) : जिले में बुधवार को राजनीति सरगरमी काफी तेज हो गयी. इसके दो मुख्य वजह रहे. एक तो केरल के राज्यपाल निखिल कुमार ने अपना इस्तीफा सौंपा. दूसरा, लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान किया जाना.
वैसे तो देश की दो बडी राजनीतिक पार्टियां माने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के साथ ही जदयू व अन्य पार्टियों ने औरंगाबाद व काराकाट संसदीय सीट के उम्मीदवारों की घोषणाएं नहीं की है. बावजूद इसके उम्मीदवारों को लेकर कयास लगाने के साथ-साथ संभावना भी व्यक्त की जा रही है. केरल के राज्यपाल निखिल कुमार के इस्तीफा सौंपने के बाद से यह तय माना जा रहा है कि वे कांग्रेस के टिकट पर औरंगाबाद संसदीय सीट से चुनाव लडेंगे.
इधर, बुधवार से ही चुनाव आचार संहिता भी लागू कर हुआ, जिसके साथ ही जिले में राजनीति का पारा भी चढ.ने लगा है. पूरे देश में नौ चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव बिहार में छह चरणों में कराने की घोषणा कर दी गयी. इसमें से 10 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण में औरंगाबाद जिले में भी मतदान संपन्न कराया जायेगा.
आसान नहीं होगी जीत
लोकसभा चुनाव में औरंगाबाद संसदीय सीट से चुनाव जीतना किसी भी उम्मीदवारों के लिए आसान नहीं होगा. हालांकि, अभी तक भाजपा व जदयू द्वारा अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गयी है. लेकिन कांग्रेस-राजद के गंठबंधन में औरंगाबाद से पहले राज्यपाल निखिल कुमार चुनाव लडेंगे. ऐसा उनके अपने पद से इस्तीफा देने के बाद लगभग तय ही है.
इधर, जदयू से सांसद सुशील कुमार सिंह को निष्कासित किये जाने के बाद उनका भाजपा के टिकट पर औरंगाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड.ने की उम्मीद जतायी जा रही है. इस बीच अपने उम्मीदवार को लेकर जदयू अब तक मौन धारण की है. फिर भी कांग्रेस की ओर निखिल कुमार व भाजपा की ओर से सुशील कुमार सिंह में कडा मुकाबला होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. यह संभावना भी अब तक जिले में जो राजनीतिक बिसात की तसवीरे उभर कर सामने आई है. इसी के अनुसार व्यक्त की जा रही है. क्योंकि औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र निखिल कुमार और उनके परिवार का पुराना गढ. रहा है.
साथ ही लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने लगातार क्षेत्र का भ्रमण भी किया है. राजद से गंठबंधन भी हो चुका है. अब राजद और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक मिलाने के बाद उनकी दावेदारी प्रमुख मानी जा रही है. इधर, भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर चरम पर है. औरंगाबाद संसदीय सीट के संभावित उम्मीदवार सांसद सुशील कुमार भी लगातार अपने क्षेत्र में रहे हैं, और क्षेत्र के विकास के साथ-साथ अपने क्षेत्र के लोगों के दुख-सुख के साथी भी रहे हैं.
इस लिहाज से उनका पलडा भी भारी साबित होने की गुजाइंश है. इन दोनों पार्टियों के अलावा जदयू, बसपा की ओर से संतोष कुमार कुशवाहा व अन्य पार्टियों के उम्मीदवार भी निश्चित तौर पर कुछ वोट काटेंगे या यह भी हो सकता है कि पूरा वोट बैंक ही उनके खाते में जाये और जीत ही हासिल कर लें. ऐसी स्थिति में सभी उम्मीदवारों के बीच बेहद कडा मुकाबला होने की संभावना है.
