लाखों किसानों की उम्मीदों को लगे पंख

औरंगाबाद कार्यालय : बिहार-झारखंड के सवा लाख हेक्टेयर भूमि को सिचिंत करनेवाली सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना उत्तर कोयल नहर परियोजना की बाधाएं को दूर करने की योजना पीएमओ कार्यालय ने बनायी है. इससे संबंधित जानकारी औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने सोमवार को पत्रकार वार्ता कर दी है. सांसद ने पीएमओ द्वारा जारी किये […]

औरंगाबाद कार्यालय : बिहार-झारखंड के सवा लाख हेक्टेयर भूमि को सिचिंत करनेवाली सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना उत्तर कोयल नहर परियोजना की बाधाएं को दूर करने की योजना पीएमओ कार्यालय ने बनायी है. इससे संबंधित जानकारी औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने सोमवार को पत्रकार वार्ता कर दी है. सांसद ने पीएमओ द्वारा जारी किये गये पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 20 दिसंबर को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की उपस्थिति में एक बैठक हुई, जिसमें पांच सांसद शामिल हुए थे. यह इनके साथ चौथी और निर्णायक बैठक थी. बैठक के उपरांत पीएमओ कार्यालय द्वारा उत्तर कोयल के कुटकु डैम में फाटक लगाने पर लगाई गयी रोक को हटाने के लिए एक गाइडलाइन जारी की है. इसमें तिथि का निर्धारण भी कर दिया गया है.
वन व पर्यावरण मंत्रालय की रोक भी हटी : सांसद ने पीएमओ कार्यालय के प्रधान सचिव द्वारा जारी किये गये पत्र का हवाला देते हुए बताया कि कुटकु डैम में गेट लगाने के लिये केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगायी गयी रोक को हटाने के लिए दिशानिर्देश दिये गये हैं. इसके लिए झारखंड सरकार के वन संरक्षण अधिनियम व वाणिज्य संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत संबंधित जिला वन अधिकारी को 31 जनवरी तक आवेदन प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया गया है.
साथ ही झारखंड सरकार को भी निर्देश दिया गया है कि आप सु›निश्चित करें कि राज्य के स्तर से शेष सारी स्वीकृतियां 10 दिन के भीतर पूरा करते हुए एक आवेदन वन व पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को भेजा जाये. झारखंड सरकार को यह भी जिम्मेवारी सौंपी गयी है कि परियोजना में वन संबंधित घटक के भुगतान में छूट व अनिवार्य वनीकरण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर व पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार कानूनी परामर्श अतिशीघ्र पूर्ण करें. ताकि, परियोजना का कार्य शीघ्र ही शुरू किया जाये. इसमें यह उल्लेख किया गया है कि दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने शेष कार्यों यानी कि कुटकु डैम में फाटक लगाने व अन्य कार्य को पूरा करने के लिए जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत किसी केंद्रीय एजेंसी से कार्य को कार्यान्वित करायी जाये. इसके लिए एक सशक्त निगरानी समिति गठित की जाये, जिसकी अध्यक्षता सचिव जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार करेंगे. इसके लिए बिहार व झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, केंद्रीय जल आयोग, सलाहकार, नीति आयोग व वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार समिति के सदस्य होंगे.
सांसद के प्रयास से मिली सफलता
औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए एक लंबा संघर्ष किया है. अपने द्वारा किये गये प्रयास की जानकारी पत्रकार वार्ता में देते हुए सांसद ने कहा कि 2009 के चुनाव के पहले से मैं इस परियोजना के बाधाओं को दूर करने के लिये प्रयास शुरू किया था. जब भी मौका मिला सदन में उठाया. यूपीए की सरकार के वन व पर्यावरण मंत्रालय उनके संबंधित मंत्री, यहां तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिला, लेकिन मुझे सफलता नहीं मिल पा रही थी. जब केंद्र में एनडीए की सरकार बनी, तो हमने पांच सांसदों की टीम बनायी. प्रधानमंत्री के कार्यालय से संपर्क स्थापित कर इस पर बैठक की और अंतत: हमें सफलता मिली. सांसद ने यह भी कहा कि जिस बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, वह 20 दिसंबर को ही होनेवाली थी, लेकिन किसी कारणवश 22 दिसंबर को हुई और इसमें आठ बिंदुओ पर निर्णय लिया गया. सभी बिंदुओं को पूरा करने के लिये तिथि निर्धारित कर दी गयी है.
अप्रैल तक पूरा करना है निविदा का कार्य
पीएमओ कार्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार शेष कार्यों को कार्यान्वयन के लिए निविदा प्रक्रिया, कार्य आदेश आदि को शीघ्र पूरा करते हुये कार्य की शुरुआत अप्रैल 2017 तक कर ली जाये. पीएमओ ने यह भी आदेश दिया है कि शेष कार्यों के लिये अधिग्रहण की प्रक्रिया को बिहार व झारखंड सरकार जल्द शुरू करें.
1192 करोड अनुमानित लागत होगी
उतर कोयल परियोजना के शेष कार्य को पूर्ण करने के लिये अनुमानित लागत 1192 करोड आंकी गयी है. सम्मान कार्यों का खर्च भारत सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी. और यह पैसा ऋण के लिये नाबार्ड से उपलब्ध कराया जायेगा. परियोजना पूरा होने पर दोनों राज्यों द्वारा 15 वर्ष में इसका भुगतान किया जायेगा.
41 साल से अधूरी है परियोजना
उल्लेखनीय है कि उत्तर कोयल परियोजना पिछले 41 सालों से अधूरी पड़ी हुई है. 2007 में केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कुटकु डैम में फाटक लगाये जाने पर यह कहते हुए रोक लगा दी गयी थी कि डैम में फाटक लगने से छह हजार से भी अधिक हेक्टेयर वन भूमि डूब जायेगी और इससे टाइगर प्रोजेक्ट प्रभावित होगा.

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