रौनियार समेत वैश्य समाज से जुड़ी सात जातियों का नहीं बन पा रहा प्रमाणपत्र

दाउदनगर अनुमंडल : दाउदनगर अंचल कार्यालय स्थित आरटीपीएस काउंटर से बनिया वर्ग की सात जातियों का जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा है. यह स्थिति एक जनवरी 2016 से ही कायम है, लेकिन एक वर्ष बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. स्थिति यह है कि जाति प्रमाणपत्र बनवानेवाले अभ्यर्थियों को […]

दाउदनगर अनुमंडल : दाउदनगर अंचल कार्यालय स्थित आरटीपीएस काउंटर से बनिया वर्ग की सात जातियों का जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा है. यह स्थिति एक जनवरी 2016 से ही कायम है, लेकिन एक वर्ष बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. स्थिति यह है कि जाति प्रमाणपत्र बनवानेवाले अभ्यर्थियों को सहज वसुधा केंद्र या साइबर कैफे में ऑनलाइन आवेदन करने पर ही इन जातियों का जाति प्रमाणपत्र निर्गत हो पा रहा है. ऑनलाइन आवेदन करने में प्रति प्रमाणपत्र अभ्यर्थियों को दस रुपये खर्च तो हो ही रहे हैं, साथ ही ऑनलाइन करने के 10 दिन बाद ही उन्हें आरटीपीएस काउंटर से जाति प्रमाणपत्र बना कर मिल सकता है.

क्या है समस्या : आरटीपीएस काउंटर के कार्यपालक सहायक ने बताया कि जिले से जो सॉफ्टवेयर भेजा गया है, उसमें बनिया जाति की सात पारीछ रौनियार, केसरवानी, सुढी, मोदक, माथरा, मोदी, पनसारी के आवेदन अपलोड नहीं हो रहा है. इसके कारण इन पारीछों का जाति प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है.

यह समस्या आइटी सेक्शन की है. उम्मीद थी कि एक जनवरी 2017 को नया सॉफ्टवेयर लोड होने के बाद इस समस्या का समाधान हो ,लेकिन ऐसा हो न सका. औरंगाबाद जिले व खासकर दाउदनगर में प्रमुख रूप से रौनियार, केसरवानी, सुढी पारीछ की संख्या अधिक है. इसके कारण काफी संख्या में जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इस जाति के लोग पहुंचते हैं. आइटी सहायक ओमप्रकाश ने बताया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जायेगा.

उन्होंने दावा किया कि साइबर कैफे से आवेदन ऑनलाइन होने पर भी दो तीन दिनों के भीतर जाति प्रमाणपत्र अभ्यर्थियों को दे दिया जाता है. जब जिला आइटी मैनेजर प्रफुल्ल कुमार से ‘प्रभात खबर’ प्रतिनिधि ने दूरभाष पर पूछा, तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं मिली थी. अब जब जानकारी मिली है, तो समस्या का समाधान कर दिया जायेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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