रफीगंज : गया-मुगलसराय रेलखंड के जाखिम स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित अमरपुरा गांव के समीप मदार नदी पर बने रेल पुल से गुजरना तीन जिंदगियों के लिए भारी पड़ गया. वैसे तो, इलाके के आधा दर्जन गांवों के लोग लगभग हर रोज इस पुल से गुजरते हैं. ऐसे में जिंदगी-मौत की आंख-मिचौनी तो यहां हर रोज ही होती है़ यह अगल बात है कि इस बार के खेल में मौत आगे निकल गयी.
ग्रामीण सुनील कुमार, जितू कुमार,श्रीकांत यादव, राजेंद्र कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि अमरपुरा, सिनवारी, दोसमा, करमूखाप, डबुरा, चातर, खैरा, केशोपुर, बलिमल, सिमरी, परसडीह, पचरिया सहित दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन इसी रेलवे पुल पर बने ट्रैक से होता है.
यही नहीं कझपा बाजार में अवस्थित मध्य विद्यालय, उच्च विद्यालय व कॉलेज में पढ़ने के लिए इसी रास्ते से छात्र-छात्राएं गुजरते हैं. ऐसी स्थिति में दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है. रेल प्रशासन से ट्रैक के बगल में पुल निर्माण की मांग कई वर्षों से की जा रही है.
गांववालों ने बताया कि वर्ष 1998 में पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के डिब्बे में जब आग लगी थी, तब आग पर काबू पाने में आसपास के ग्रामीणों द्वारा रेल प्रशासन को काफी सहयोग किया गया था. उच्च पदाधिकारियों द्वारा पुल निर्माण कराने की घोषणा भी उस वक्त की गयी थी, लेकिन आज तक यह आश्वासन के रूप में ही चलता रहा. स्टेशन प्रबंधक एमके अनवर ने स्वीकार किया कि आवागमन के लिए पुल की आवश्यकता है. प्राय: उक्त स्थल पर दुर्घटनाएं होती रहती है.
