किसानों का गुस्सा देख वापस लौटे अधिकारी

औरंगाबाद नगर : शहर से सटे ओरा गांव में बुधवार को अतिक्रमण हटाने गये अधिकारी ग्रामीणों का गुस्सा देख बगैर अतिक्रमण हटाये वापस लौट आये. सदर सीओ शंकर लाल विश्वास, एनएचआइ के अधिकारी व पुलिस बल के साथ जेसीबी लेकर ओरा गांव पहुंचे थे. वैसे ही, अधिकारियों को देख कर ग्रामीण आग-बबूला हो गये और […]

औरंगाबाद नगर : शहर से सटे ओरा गांव में बुधवार को अतिक्रमण हटाने गये अधिकारी ग्रामीणों का गुस्सा देख बगैर अतिक्रमण हटाये वापस लौट आये. सदर सीओ शंकर लाल विश्वास, एनएचआइ के अधिकारी व पुलिस बल के साथ जेसीबी लेकर ओरा गांव पहुंचे थे.
वैसे ही, अधिकारियों को देख कर ग्रामीण आग-बबूला हो गये और अपना तेवर दिखाते हुए अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने से रोक दिया. हालांकि, अंचलाधिकारी ने जबरन दल-बल के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए एक मकान को ध्वस्त करने के लिए जैसे ही काम लगाया, वैसे ही ग्रामीण अपना आक्रोश दिखाते हुए जेसीबी चालक को पीछे मुड़ने को विवश कर दिये. इसके बाद स्थिति को बिगड़ते देख अंचलाधिकारी ने इसकी सूचना सदर एसडीओ को दी. सूचना मिलते ही सदर एसडीओ सुरेंद्र प्रसाद, एसडीपीओ पीएन साहू और विरोध कर रहे ग्रामीणों से वार्ता की.
इस दौरान एसडीओ ने कहा कि वर्ष 2012 में ही एनएचआइ द्वारा सिक्स लेन सड़क बनाने के लिए ओरा गांव की कुछ जमीन को अधिग्रहित किया है. यहां तक कि मुआवजा की राशि भी मिल गयी है. विरोध करने, भीड़ इकट्ठा करने व आंदोलन करने से यह कार्य रूकनेवाला नहीं है, बल्कि हर हाल में जमीन पर जो घर बना हुआ है, उसे हटाया जायेगा, क्योंकि अतिक्रमण रहने के कारण एनएचआइ के कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है. यदि स्वेच्छा से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन हटायेगा और जुर्माना भी लगेगा. इसलिए आप लोग विरोध नहीं करें. पहले कई बार जमीन खाली करने को लेकर नोटिस दी जा चुकी है.
इधर, ओरा गांव के ग्रामीण सह जिला पार्षद अनिल कुमार यादव ने कहा कि जमीन वे लोग तभी खाली करेंगे, जब उचित मुआवजा मिलेगा. हम सभी ग्रामीणो को 14 हजार रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा मिल रहा है, जबकि इस जमीन का कीमत वर्तमान में तीन से चार लाख रुपये प्रति डिसमिल है. इसलिये कौड़ी के दाम पर हमलोग किसी भी सूरत में जमीन को खाली नहीं करेंगे. इस पर एसडीओ ने कहा कि आपलोगों की जमीन जिस समय अधिग्रहित की गयी थी, उस समय का मुआवजा राशि दिया गया है.
इसलिए विरोध का कोई तुक नहीं है. यदि किसी प्रकार का गतिरोध है, तो जिला पदाधिकारी से वार्ता करें. इसके बाद पांच ग्रामीणों को एसडीओ ने वार्ता के लिए डीएम के पास ले गये. मामला चाहे जो भी हो, ग्रामीणों के आक्रोश के कारण बगैर अतिक्रमण हटाये अधिकारी वापस लौट आये.

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