सात माह में केवल 78 सिजेरियन
औरंगाबाद नगर : एक तरफ सरकारी अस्पतालों में पहुंचनेवाले सभी प्रकार के रोगियों को इलाज से लेकर ऑपरेशन करने तक की सुविधा है. इस पर सरकार प्रत्येक माह लाखों रुपये भी खर्च कर रही है, लेकिन इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. प्रसव के वक्त सिजेरियन ऑपरेशन का यही हाल है.
अक्सर ऐसी नौबत आने पर सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर महिला को निजी अस्पतालों में भेज देते हैं. यही कारण है कि जिले में सात माह में मात्र 78 ऑपरेशन ही हुए हैं, जबकि हर रोज सिजेरियन ऑपरेशन करानेवाले मरीज हर सरकारी अस्पताल से रेफर होते है. विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाये, तो सबसे बदतर हालत बारुण व दाउदनगर पीएचसी की है, जहां अप्रैल माह से लेकर अक्तूबर माह तक एक भी सिजेरियन नहीं हुआ है. वही आदर्श व आइएसओ का दर्जा प्राप्त सदर अस्पताल में पिछले सात माह में मात्र 11 सिजेरियन ही हुए है, जो कि काफी कम है. जब जिला की अस्पताल की यह हालत है, तो अन्य अस्पताल की हालत क्या होगी, इसे बेहतर समझा जा सकता है. जिले में सबसे बेहतर स्थिति गोह पीएचसी की है, जहां सबसे अधिक, जहां सदर अस्पताल से तीन गुना, यानी कि 31 सिजेरियन ऑपरेशन हुए हैं. वही, दूसरे स्थान पर हसपुरा पीएचसी है, जहां 21 सिजेरियन हुए हैं, तीसरे स्थान पर सदर अस्पताल है, जहां कि 11 सिजेरियन हुए हैं.
जबकि, देव पीएचसी में आठ, जम्होर में चार, मदनपुर में दो, तो नवीनगर में मात्र एक ही सिजेरियन हुआ है, जबकि बारुण, दाउदनगर, ओबरा, रफीगंज एवं कुटुंबा में एक भी सिजेरियन नहीं हुआ. यह हालत तब है, जब हर माह डीएम की मीटिंग में यह निर्देश दिया जाता है कि सदर अस्पताल में कम से कम प्रत्येक 10 सिजेरियन करने का निर्देश दिया जाता है, बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो रहा है, जबकि सदर अस्पताल में एक सर्जन डॉक्टर तो दो महिला डॉक्टर हैं. फिर भी, कोई बदलाव नहीं दिख रहा है, पीएचसी की बात तो दूर की है. जब इस संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक कुमार मनोज ने कहा कि इसकी जांच करायी जायेगी. इसके बाद कार्रवाई करने के लिए वरीय पदाधिकारी को लिखा जायेगा.
