मनमानी. अतिक्रमण मामले में आंख मूंदे सोया है नगर पर्षद प्रशासन
औरंगाबाद : औरंगाबाद शहर के मध्य भाग से गुजरा शाहपुर-टिकरी नाला शहर के जलनिकासी का एकमात्र साधन है. लेकिन, शहर के ही कुछ लोग निजी स्वार्थ साधने में नाले का अस्तित्व समाप्त करने में लगे हैं. नाले की जमीन दर्जनों मकान बना लिये गये हैं. कई जगहों पर तो नाला सिकुड़ कर नाली के स्वरूप में आ गया है.
नाले में होने वाले अतिक्रमण को रोक पाने में नगर पर्षद पूरी तरह असफल साबित हो रही है.अतिक्रमणकारियों के ऊपर कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमण तेज गति से जारी है.इसी तरह इसका अतिक्रमण होता रहा, तो इस शहर का मुख्य जल निकासी का यह साधन समाप्त हो जायेगा. फिर यह शहर जलजमाव जैसी समस्या से उबर नहीं पायेगा.
औरंगाबाद कार्यालय.
औरंगाबाद शहर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की पूरी छूट है. चाहे आवागमन का मार्ग हो या नाले की जमीन हो या फिर और कहीं खाली पड़ी सरकारी जमीन.अतिक्रमणकारियों पर यहां कार्रवाई नहीं होती है. कार्रवाई होती, तो शाहपुर से निकले टिकरी नाले पर दर्जनों मकान नहीं बनते़ नाला सिकुड़कर नाली का रूप धारण कर चुका है़ स्थिति यह हो गयी है कि 60 फीट चौड़ा नाला कहीं 10 फीट, कहीं आठ तो कहीं पांच फीट चौड़ाई में है.
कुछ जगहों पर तो इसका अस्तित्व भी मिट गया है. वैसे इस नाले में अतिक्रमण करने का कार्य दो-चार माह या साल-दो साल से नहीं हो रहा है. नाले की जमीन पर बने आधे दर्जन मकान तो 15 साल पुराने हो चुके हैं. इन्हीं पुराने मकानों को देख कर अब इसमें बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया जा रहा है. कई नयी मकान भी मकान लिये गये है. कई जगहों पर मकान की चहारदीवारी नाले पर बन रही है. कई मकानों की सीढ़ी नाले से होकर गुजर रही है.
कुछ ऐसे मकान हैं,जिनमें मोटे लोहे का सरिया देकर बीम खड़ा कर दिया गया है और उस पर मकान का निर्माण किया गया है,यानी कि नाले की जमीन को लोग अब आवासीय जमीन की तरह उपयोग कर रहे हैं. नगर पर्षद के पदाधिकारी और जिम्मेवार लोगों ने अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण कर मकान बनाने की खुली छूट दे दी है.
