सदर अस्पताल में कुव्यवस्था पर भड़की जांच टीम, साफ-सफाई के दिये निर्देश

औरंगाबाद शहर : सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था किसी से छुपी नहीं है. डॉक्टरों की कमी ने अस्पताल की व्यवस्था को पंगु बना कर रख दिया है. यही कारण है कि उपाधीक्षक से लेकर अन्य डॉक्टर व कर्मचारी असंतोष की भावना से काम कर रहे हैं. कई दफे व्यवस्था सुधारने की पहल की गयी, लेकिन […]

औरंगाबाद शहर : सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था किसी से छुपी नहीं है. डॉक्टरों की कमी ने अस्पताल की व्यवस्था को पंगु बना कर रख दिया है. यही कारण है कि उपाधीक्षक से लेकर अन्य डॉक्टर व कर्मचारी असंतोष की भावना से काम कर रहे हैं. कई दफे व्यवस्था सुधारने की पहल की गयी, लेकिन हुआ कुछ नहीं. जिस तरह से पांच सौ व हजार के पुराने नोट आज रद्दी बन गये, उसी तरह से उपाधीक्षक व चिकित्साकर्मियों द्वारा व्यवस्था सुधारने के लिए लिखे गये सभी पत्र भी रद्दी बन गये. निरीक्षण का ड्रामा भी लगातार चल रहा है. रविवार की सुबह केंद्र व राज्य की टीम एक साथ निरीक्षण करने पहुंची

और अस्पताल के गेट से लेकर इमरजेंसी, ब्लड बैंक, महिला-पुरुष वार्ड, प्रसव वार्ड, एसएनसीयू का निरीक्षण किया. इस दौरान कई खामियां पायी गयी.एनएचएसआरसी दिल्ली के पीएचए डिवीजन के एडवाइजर हिमांशु भूषण ने सिविल सर्जन राम प्रताप सिंह, डीपीएम कुमार मनोज, उपाधीक्षक राजकुमार प्रसाद को कई दिशा-निर्देश दिये और व्यवस्था पर असंतोष जताया. इस दौरान अस्पताल के प्रबंधक हेमंत राजन को फटकार भी लगायी और व्यवस्था को जल्द सुधारने का निर्देश दिया. सुलभ शौचालय के समीप लगे कचरे के अंबार पर नाराजगी जताते हुए टीम ने जल्द हटा कर बैरिकेडिंग कराने का निर्देश दिया.

परची काउंटर में सुधार, इमरजेंसी वार्ड की असंतुलित व्यवस्था, बेवजह के लगे बोर्ड को ठीक करने की बात कही. अस्पताल परिसर में गार्डेन लगाने पर जोर दिया. हिमांशु भूषण ने स्पष्ट कहा कि इससे पूर्व अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था. व्यवस्था में थोड़ी सुधार हुई, लेकिन पूरा ध्यान नहीं दिया गया और यह बरदाश्त करने लायक नहीं है. जांच टीम ने एंबुलेंस कॉल सेंटर कक्ष का भी निरीक्षण किया और कोऑर्डिनेटर नीरज कुमार को फटकार लगायी.

डॉक्टर नहीं हैं, तो निरीक्षण किस काम का : जिस वक्त सदर अस्पताल का हिमांशु भूषण निरीक्षण कर रहे थे, उसी दौरान अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ राजकुमार प्रसाद ने टीम के समक्ष ही आक्रोश जताते हुए कहा कि निरीक्षण किस काम का, जब डॉक्टर ही नहीं है. डॉक्टर के लिये गुहार लगाते-लगाते थक गया, पर कहीं सुनवाई नहीं हुई. व्यवस्था तभी सुधरेगी, जब डॉक्टर होंगे. प्रतिदिन सैकड़ों मरीज अस्पताल में इलाज कराने आते है, लेकिन डॉक्टर की कमी की वजह से हो-हल्ला करते हैं.
ऐसे कैसे काम चलेगा. इस पर निरीक्षण कर रही टीम के पदाधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और किसी तरह बात को टाल दिया. सवाल यह उठता है कि निरीक्षण में होता क्या है. निरीक्षण टीम में राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी मातृत्व स्वास्थ्य फुलेश्वर झा, अजीत सिंह, श्वेता राय भी शामिल थे.

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