राहगीरों के दुश्मन बने आवारा कुत्ते

औरंगाबाद शहर : औरंगाबाद की सड़कों पर कुत्ते इन दिनों मौत का पैगाम लिए घुम रहे हैं. शहर की सड़कों पर कुत्तों की संख्या इतनी अधिक हो गयी है, कि लोगों को राह चलने में मुश्किल होती है. कुत्तों की वजह से शहर में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बेतहाशा बढ़ गयी है. वहीं, कुत्तों के […]

औरंगाबाद शहर : औरंगाबाद की सड़कों पर कुत्ते इन दिनों मौत का पैगाम लिए घुम रहे हैं. शहर की सड़कों पर कुत्तों की संख्या इतनी अधिक हो गयी है, कि लोगों को राह चलने में मुश्किल होती है. कुत्तों की वजह से शहर में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बेतहाशा बढ़ गयी है. वहीं, कुत्तों के काटने से भी लोग परेशान हैं.
यही कारण है कि पिछले 15 दिनों में आवारा कुत्तों के कारण शहर के महाराजगंज रोड और मुख्य बाजार पथ में कई दुर्घटनाएं घट चुकी हैं. शाम होते ही शहर की सड़कों पर कुत्तों का झुंड दिखने लगता है. ये झुंड कब किस पर झपट जाये और किसे काट ले, यह कहा नहीं जा सकता. महाराजगंज रोड में पीएनबी बैंक, नागा बिगहा मोड़, रमेश चौक, सदर अस्पताल मोड़, बस पड़ाव मोड़ और सिन्हा कॉलेज मोड़ पर रात में गुजरने से भी लोग डरते हैं.
सबसे अधिक परेशानी व भय बाइक चालकों को होता है. चलते वक्त बाइक चालकों की एक आंख सड़क पर दौड़ती है, तो दूसरी आंख कुत्तों पर लगी रहती है. कब कौन कुत्ता बाइक के नीचे आ जाये और दुर्घटना हो जाये, कहा नहीं जा सकता. कुछ जगहों पर तो बाइक चालकों को अावारा कुत्ते कुछ दूर तक खदेड़ते भी हैं. सोमवार की रात नागा बिगहा मोड़ के समीप बाइक से सुंदरगंज जा रहे राहुल और सोनू कुमार नामक दो भाई आवारा कुत्तों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गये. दुर्घटना इतनी भयावह थी कि बाइक के साथ दोनों भाई कुत्ते को घसीटते हुए 100 मीटर की दूरी तक चले गये. इस दुर्घटना में कुत्ते की मौत हो गयी, जबकि दोनों भाई गंभीर रूप से जख्मी हो गये, जिनका इलाज सदर अस्पताल में किया गया.
10 दिनों के अंदर अभाविप के प्रदेश मंत्री दीपक कुमार, भोपतपुर पंचायत के डीलर अवधेश ओझा, न्यू एरिया के संजय कुमार, ब्लॉक कॉलोनी के मंतोष कुमार, शाहपुर के सुनील प्रसाद, बारुण के अमोद कुमार, सुरेंद्र कुमार आवारा कुत्तों के कारण बाइक से दुर्घटनाग्रस्त हो गये. इनमें तीन लोगों को सदर अस्पताल से रेफर किया गया. इधर, नगर पर्षद के पास आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने के लिये कोई योजना नहीं है. नगर पर्षद की मुख्य पार्षद श्वेता गुप्ता कहती हैं कि आवारा पशुओं के लिये उनके पास कोई योजना नहीं है, लेकिन पशुपालन विभाग को इसके लिये लिखा जा रहा है.

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