अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई के दावे की निकली हवा
औरंगाबाद शहर : औरंगाबाद शहर के सौंदर्यीकरण की बात उस समय बेमानी साबित होती है,जब मुख्य नाले का हाल देखा जाता है. जिस नाले से शहर की एक बड़ी आबादी का पानी घरों से निकलता है, उस नाले का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है. नाले को एक तरह से लोगों ने अतिक्रमित भी कर लिया है
यही कारण है कि जिस नाले की चौड़ाई कभी 20 से 25 फीट होती थी, अब चार से छह फीट के करीब रह गयी है. कुछ जगहों पर तो नाले पर ही मकान बना दिये गये है. ऐसी बात नहीं कि नाला पर अतिक्रमण करने की जानकारी नगर पर्षद को नहीं है. इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. यहां बता दें, कि कुछ माह पूर्व नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार ने मीडिया को बताया था कि नाले पर जिन लोगों ने अवैध रूप से घर बना लिया है या उसकेभाग को कब्जा कर लिया है, उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्हें नोटिस भेजी जायेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मुख्य पार्षद श्वेता गुप्ता ने भी नाला को अतिक्रमण मुक्त कराने का दावा किया था,लेकिन इनके दावे भी फेल हो गये. आज पानी की निकासी नहीं होने के कारण अधिकांश इलाकों में जलजमाव की स्थिति है, फिर शहर के सौंदर्यीकरण की बात कैसे की जा सकती है. इस संबंध में पूछे जाने पर मुख्य पार्षद श्वेता गुप्ता ने कहा कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजी गयी थी, कुछ लोगों ने जवाब भी दिया है. जिन लोगों ने जवाब नहीं दिया, उन लोगों के पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. नाला निर्माण को भी गति दी गयी है.
