मां के आंसू से परिजनों की आंखें नम

दाउदनगर (अनुमंडल) : गरीब व दलित परिवार की सोनम कुंवर की रूलाई से सभी की आंखें नम हो उठी हैं. रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही है. तीन साल पहले पति ने साथ छोड़ा और अब बडी बेटी ने साथ छोड़ दिया. वह रोते-रोते कहती है ‘हमर बेटिया लूटा गईलक गे माई ….’. स्मरण हो […]

दाउदनगर (अनुमंडल) : गरीब व दलित परिवार की सोनम कुंवर की रूलाई से सभी की आंखें नम हो उठी हैं. रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही है. तीन साल पहले पति ने साथ छोड़ा और अब बडी बेटी ने साथ छोड़ दिया. वह रोते-रोते कहती है ‘हमर बेटिया लूटा गईलक गे माई ….’. स्मरण हो कि कि मंगलवार की शाम दाउदनगर-बारुण रोड पर पीएचसी के पास एक एंबुलेंस से कुचलकर नौ वर्षीया नयना कुमारी की मौत हो गयी थी. मृतका की नानी कांति देवी ने बताया कि नयना के पिता स्व सुधीर की मौत करीब तीन साल पहले हो गयी थी.

सोनम कुंवर अपनी तीन बेटियों के सहारे अपने जीवन की नैया पार करने का सपना संजोये हुई थी. नगर पंचायत में एनजीओ के माध्यम से सफाई कार्य करने वाली सोनम अपनी बेटियों नयना, मेघा व नेहा का पालन पोषण कर रही थी.

सोनम की खुशियों को न जाने किसकी नजर लग गयी और बडी बेटी नयना दुर्घटना का शिकार हो गयी. सोनम अपनी मंझली बेटी मेघा व छोटी बेटी नेहा को गोद में छिपकाये बिलख-बिलख कर रो रही थी.

नाना ने दर्ज करायी प्राथमिक

मृतका नयना के नाना एवं बम रोड वार्ड संख्या-16 निवासी सज्जन राम ने एंबुलेंस चालक के खिलाफ दाउदनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. प्राथमिकी में कहा है कि उनकी नतिनी घर का कचड़ा लेकर पश्चिम से पूरब रोड पार करके जा रही थी. उसी समय एक मारुति एंबुलेंस के चालक ने धक्का मार दिया. वह बुरी तरह से जख्मी हो गयी. पीएचसी से उसे सदर अस्पताल औरंगाबाद रेफर कर दिया गया, जहां उसकी मौत हो गयी. यह घटना पीएचसी से सटे उतर में दाउदनगर-बारुण रोड की है. प्राथमिकी में कहा गया है कि चालक की तेजी व लापरवाही से नयना की मौत हुई है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेज दिया है. दुर्घटना को अंजाम देने वाले एंबुलेंस को जब्त कर लिया गया है .

पीएचसी के पास हमेशा रहती है दुर्घटना की आशंका

दाउदनगर दाउदनगर-बारुण रोड पर मंगलवार की शाम पीएचसी के पास जिस स्थान पर निजी अस्पताल के एंबुलेंस से कुचल कर नौ वर्षीया बच्ची की मौत हुई, वह स्थान वास्तव में डेंजर जोन है. दलितों की आबादी इसी स्थान पर बसी है. इस जाति के लोग सड़क किनारे मिट्टी व फुस की झोपड़ी बना कर रहते हैं और सफाई कार्य कर अपना जीवन यापन करते हैं. इस स्थान पर सड़क पर ही ऑटो लगाये जाते हैं, जिसके कारण रास्ता संकरा हो जाता है.

शहरी दलितों को बसाने के लिए सरकारी स्तर पर कोई योजना नहीं दिखती. महादलित विकास मंच के अध्यक्ष टूल्लु रावत का कहना है कि शहरी दलितों की स्थिति अत्यंत दयनीय है. अधिकतर भूमिहीन हैं. सरकार व नगर पंचायत को चाहिए कि उनके लिए कारगर तरीके से योजना लागू कर उन्हें आवास व भूमि उपलब्ध कराया जाये.

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