लोगों ने कहा, सहयोग के लिए हैं तैयार, चाहिए समस्या का समाधान
औरंगाबाद (ग्रामीण) : पिछले दिनों जिले में भारी बारिश से काफी तबाही मची. कई पुल-पुलिया नदी के पानी में समा गये, तो कई समाने को तैयार हैं. औरंगाबाद शहर से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सुंदरगंज के पास बटाने नदी पर बना संपर्क पथ बाढ़ के पानी में समा गया. राहत की बात यह रही कि औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह के निजी पैसे बने काउजवे सुरक्षित है.
लेकिन, काउजवे के दोनों तरफ का पूरा संपर्क पथ पानी में विलीन हो गया. इस संपर्क पथ के बहने के साथ ही लाखों की आबादी का आवागमन भी ठप हो गया. अब सुंदरगज, धनिवार, खेतपुरा, मोख्तियारपुर, नेवड़ा, गम्हारी, बसौरा, माली, बरियावां, जयहिंद तेंदुआ, करमा, मंगुराही, दुधार, बड़का गांव, टोना, सोरी, कंचनपुर व सहरसा सहित दर्जनों गांवों के लोगों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया. ऐसे में इनके पास एकमात्र रास्ता सनथुआ रोड से होकर जाता है, जिसकी दूरी अधिक है. गौरतलब है कि चतरा-नवीनगर वाया सुंदरगंज माली पथ की स्थिति पहले से ही भयावह थी. इसी बीच चार वर्ष पहले बटाने नदी पर बना पुल भी ध्वस्त हो गया. सड़क व पुल निर्माण के लिए समाजसेवी संगठन गोकुल सेना ने ग्रामीणों के साथ कई दफे आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया.
दर्जनों गांव के लोगों ने जिले के जनप्रतिनिधियों से लेकर बिहार व केंद्र के मंत्रियों का ध्यान आकृष्ट कराया. इस बीच सांसद सुशील कुमार सिंह ने लाखों की आबादी को हो रही परेशानी को देखते हुए अपने निजी पैसे से बटाने नदी पर काउजवे का निर्माण कराया. इस निर्माण कार्य के बाद चारों तरफ सांसद की प्रशंसा हुई. सांसद द्वारा बनाये गये पुल से आवागमन शुरू हुआ, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश से काउजवे तो बच गया, लेकिन दोनों तरफ का संपर्क पथ बह गया. अभी बटाने नदी पर मुख्य पुल का निर्माण कार्य चल रहा है. लेकिन, इसके कार्य की गति को देख कर लगता है कि अभी लोगों को काफी दिन इंतजार करना पड़ेगा.
फंस चुके हैं समस्याओं के मकड़जाल में
गोकुल सेना के प्रवक्ता बबलू सिंह, सुंदरगंज के धर्मेंद्र कुमार, नीरज कुमार, पूनाबार गांव के अंजय सिंह, दुधैला गांव के मोहम्मद अमीनुद्दीन व धनिवार के उदय सिंह ने कहा कि चतरा-नवीनगर वाया सुंदरगंजमाली पथ से लाभान्वित होने वाले दर्जनों गांव के लोग वर्षों से सड़क व पुल के लिए परेशानी में है. बटाने नदी से होकर जिला मुख्यालय आने-जाने में आसानी होती थी. लेकिन, अब संपर्क पथ बह जाने के बाद फिर एक बार समस्याओं के मकड़जाल में हमलोग फंस चुके हैं.
जनप्रतिनिधियों ने कभी भी ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया. सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक बना कर इस्तेमाल किया. अब देखना यह है कि संपर्क पथ का निर्माण कौन और कैसे कराता है. हमें समस्याओं का समाधान चाहिए और हम सहयोग के लिए भी तैयार हैं.
