औरंगाबाद कार्यालय : एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुई रिमझिम बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है. खास कर किसानों के चेहरे पर इसका असर साफ झलक रहा है. गरीब व कमजोर वर्ग के लोग परेशान है.
आम लोग भी इससे पूरी तरह प्रभावित हुए है. तापमान में गिरावट से दिन में भी हर व्यक्ति के शरीर पर उलेन वस्त्र व चादर दिखाई दे रहे है. लोग ठंड के प्रभाव से घर में दुबके रह रहे है. प्रशासन मौन साध कर बैठी हुई है. अलाव की व्यवस्था पूरी तरह नाकारा साबित हो रही है. शनिवार की सुबह सूर्य की किरण की बजाये बारिश के फुहारे दिखे. पूरे दिन रूक-रूक कर बारिश होती रही. दोपहर के बाद से कई स्थानों पर जोरदार बारिश.
रबी फसल को नुकसान : इस बारिश से सबसे अधिक रबी फसल का नुकसान हुआ है. जाने-माने किसान राज वंश सिंह, विजय सिंह, भगत मेहता, आलोक राम का कहना है कि इस बारिश ने तो किसानों के कलेजों पर पत्थर मारने जैसा प्रहार किया है.
मसूर, सरसो, तीसी, चने की फसल पूरी तरह या तो सड़ जायेंगे या सूख जायेंगे. गेहूं के फसल भी सूखने की संभावना है. खलिहान में रखे धान अंकुर रहे है. इस बारिश से किसानों को भारी क्षति हुई है.
नहीं जलता दिखा अलाव : रिमझिम बारिश के बाद ठंड का प्रकोप बढ़ गया है. लेकिन जिला प्रशासन इससे पूरी तरह बेखबर दिख रही है. शनिवार के दिन पूरे शहर में कहीं भी अलाव नहीं जलाये गये. रिक्शा चालक, मजदूर व कमजोर वर्ग के लोग ठिठुरते रहे. लेकिन इनकी सुधी लेने वाला कोई दूर-दूर तक दिखाई नहीं दिया.
बारिश से पसरा रहा सन्नाटा : रिमझिम बारिश से उत्पन्न हुई ठंड की स्थिति का प्रभाव शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी पड़ा है. शनिवार को शहर में गांव जैसा स्थिति दिखाई दी. मुख्य पथ पर काफी कम लोग चले. वाहनों का भी परिचालन अन्य दिनों की भांति कम रही. व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर असर दिखा. आधे से अधिक दुकान शाम पांच बजे से पहले ही बंद हो गये.
