अनदेखी. प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा अंधविश्वास का खेल
मंगल ग्रह पर आशियाना बनाने की बातें तो सोच रहे हैं, लेकिन समाज में फैले अंधविश्वास को कम करने या समाप्त करने के बारे में ध्यान नहीं दिया जाता है. इससे समाज में आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती है, जिससे इसे समाप्त करने की आवश्यकता महसूस होती है. हाल ही में दाउदनगर में ओझाई के चक्कर में 13 लोगों की जानें चली गयीं.
औरंगाबाद जिले में सैकड़ों ऐसी जगहहैं, जहां अंधविश्वास के नाम पर मची है लूट
औरंगाबाद (ग्रामीण) : एक तरफ हम अपने विकास के दावे को पुख्ता करते नजर करते आते हैं. साइंस की पहुंच की सराहना करते हुए थकते नहीं है. मंगल ग्रह पर हम आशियाना बनाने की सोच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज का एक तबका आज भी अंधविश्वास की जद में फंसा हुआ है. छोटी-छोटी बीमारियों से लेकर जानलेवा बीमारियों को ठीक करने के साथ अपने व पूरे परिवार के भविष्य को जानने के लिए अंधविश्वास का सहारा लेने में लगे हैं. हजारों लोग अंधविश्वास के चक्कर में फंस कर पैसा तो लूटा ही रहे हैं, अपनी प्रतिष्ठा भी दावं पर लगा रहे हैं.
छोटी-छोटी बात को लेकर ओझा-गुनी के चक्कर में लोग पड़ते दिख रहे हैं. किसी के घर चोरी हो गयी, किसी को सांप ने डंस लिया, किसी का जानवर बाधार से गायब हो गया, किसी के घर जानवर की मौत हो गयी, किसी के घर अकाल मृत्यु हो गयी या किसी को संतान नहीं हो रहा है, तो वह इन समस्याओं का हल करने के लिए सीधे अंधविश्वास को अपनाते हुए ओझाओं के चक्कर में पड़ रहे हैं. औरंगाबाद जिले में सैकड़ों ऐसी जगह हैं, जहां अंधविश्वास के नाम पर लूट मची है. ऐसी बात नहीं कि इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं है.
बावजूद अंधविश्वास का खेल जारी है. वैसे समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं. कुछ माह पहले बेढ़ना गांव में अखिलेश भुइंया की बेटी रेणु ने नाग देवता से शादी रचने की घोषणा की थी. तय समय व दिन इस विवाह को देखने के लिए हजारों की हुजूम उमड़ी. लेकिन, हुआ वही जो अंधविश्वास का होता है. बावजूद हम इस पर विश्वास कर अपनी आंखों से देखने पहुंच गये. औरंगाबाद के कई जगहों पर भूतहा मेला अभी भी चल रहा है, जहां दूर-दूर से लोग आते हैं और अपनी परछाई को समेटने का दावा करते हैं.
देव प्रखंड के बेढ़ना गांव में इन दिनों अंधविश्वास का खेल खूब चल रहा है. हाथ में अगरबती लिये हुए झूमती महिलाओं को देख कर साइंस की तरक्की पर दया आती है. एक साथ दर्जनों लोग भूत-प्रेत का साया शरीर से हटाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. खासकर रविवार व मंगलवार को इनकी संख्या हजारों में होती है. खुलेआम हो रहे इस अंधविश्वास के खेल को समाप्त करने के लिए कोई पहल भी नहीं की जाती है. प्रशासनिक स्तर पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है. मदनपुर के खिरियावां, हरि बिगहा, चौधरी मुहल्ला, सरस्वती मुहल्ला व घोरहट में तो यह खेल लगातार चल रहा है. कुटुंबा प्रखंड के महुआधाम तो अंधविश्वास का जाना-पहचाना नाम है. यहां नवरात्र के समय दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं व अपनी बीमारी अंधविश्वास से भगाने का दावा करते हैं.
हमारा मकसद न तो किसी की भावना को ठेस पहुंचाना है और न अंधविश्वास को बढ़ावा देना है. अखबार के माध्यम से हम वैसे लोगों को जागरूक करना चाहते हैं, जो अंधविश्वास के बोझ से दबते जा रहे हैं. ऐसे में समाजसेवियों को एक पहल करनी चाहिए. जागरूकता ही जीवन को सुधार सकता है.
अंधविश्वास के कारण दाउदनगर में गयी 13 जानें : इसी वर्ष 22 अप्रैल को अंधविश्वास के खेल में 13 लोगों की जान चली गयीं. दाउदनगर के तरार टोले हरिनगर गांव में भी अंधविश्वास का खेल वर्षों से चल रहा था. मामला तब सामने आया, जब ओझा भोला पासवान के ओझाई ने तीन घरों को आग के हवाले कर दिया. जटा राम सहित घर के 13 सदस्य अंधविश्वास की आग में झुलस गये.
हुआ यह कि भोला पासवान की झोंपड़ी अंधविश्वास में जलायी गयी. इससे निकली चिनगारी से जटा राम के घर में आग लग गयी. उस वक्त जिला प्रशासन ने अंधविश्वास के खेल को समाप्त करने का निर्णय लिया था. लेकिन, मामला शांत होते ही इस पर से प्रशासन का ध्यान भी हट गया.
कई ओझाओं की भी गयीं जान
कभी-कभी अंधविश्वास का खेल खेलाने वालों यह भारी पड़ जाता है. वर्ष 2015 में देव व नवीनगर में चार ओझाओं की जान चली गयीं. यह खेल उन पर ही भारी पड़ गया व उनकी हत्या कर दी गयी.
