औरंगाबाद (नगर) : अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के मामले में एक लिपिक वाजिद अख्तर के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करना सिविल सर्जन (सीएस) डाॅ आरपी सिंह को महंगा पड़ गया. डीएम ने इस मामले में सिविल सर्जन से स्पष्टीकरण पूछा है और तीन दिन के अंदर जवाब भी मांगा है.
डीएम ने 11 मई, 2016 को लिखे अपने पत्र में सीएस से सपष्टीकरण पूछते हुए कहा है कि लिपिक वाजिद अख्तर पर गंभीर अनियमितता बरतने की पुष्टि हुई थी. उसके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित किये हुए 60 दिन बीतने के बाद भी आगे का निर्णय नहीं लिया गया. आपकी शिथिलता व दोषी कर्मचारी को बचाने का प्रमाणित प्रयत्न है.
इस सबंध में पूर्व में पांच जनवरी, 2016 के पत्रांक के आलोक में भी कोई कार्रवाई नहीं करने व तीन बार स्मारित करने के बाद भी अधूरा प्रपत्र गठित करने से यह माने जाने का प्रयास आधार है कि दोषी लिपिक को बचाने का भरपूर प्रयास किया गया है. उक्त लिपिक के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित होने के बाद भी काफी समय बीत जाने के बावजूद अनिवर्णित रहना बेहद गंभीर व प्रशासनिक लापरवाही है, जबकि वाजिद अख्तर की संदिग्ध व संलिप्त भूमिका जांच रिपोर्ट में स्पष्ट प्रतिवेदित की जा चुकी है.
क्यों नही आपके विरुद्ध सीसीए रुल 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में आपके सहयोगी बने रहने एवं कार्रवाई नहीं करने के आरोप में आपके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए विभाग को अनुशंसा भेजी जाये.
गौरतलब है कि वरीय उपसमाहर्ता सीमा कुमारी के नेतृत्व में औरंगाबाद शहर मेें चल रहे 14 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की गयी थी, जिसमें 11 अल्ट्रासाउंड अवैध पाये गये थे. इसके बाद डीएम ने त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया था. बावजूद सीएस की तरफ से ऐसा नहीं किया गया. इसी आलोक मे डीएम ने सीएस से स्पष्टीकरण पूछा है.
यही नहीं जिन अल्ट्रासाउंडों को सील किया गया था, उसे बाद में खोल भी दिया गया. जहां अभी भी धड़ल्ले से बिना डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है. कुछ ऐसे चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जिनकी ड्यूटी सरकारी अस्पतालों में लगी है और वे ड्यूटी पर रहते हुए ही अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं. यह जांच के बाद स्पष्ट हो जायेगा.
