महाराणा नहीं होते, तो नहीं बचती संस्कृति

जसोइया स्थित प्रतिमा स्थल पर चेतक घोड़े पर सवार महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सोमवार को योद्धा महाराणा प्रताप की 476वीं जयंती स्वाभिमान दिवस के रूप में मनायी गयी. इस मौके पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. औरंगाबाद : सोमवार को ऐतिहासिक योद्धा महाराणा प्रताप की 476वीं जयंती स्वाभिमान दिवस के […]

जसोइया स्थित प्रतिमा स्थल पर चेतक घोड़े पर सवार महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सोमवार को योद्धा महाराणा प्रताप की 476वीं जयंती स्वाभिमान दिवस के रूप में मनायी गयी. इस मौके पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी.
औरंगाबाद : सोमवार को ऐतिहासिक योद्धा महाराणा प्रताप की 476वीं जयंती स्वाभिमान दिवस के रूप में मनायी गयी. इस मौके पर शहर में युवा गर्जना संस्था द्वारा भव्य व विशाल शोभायात्रा निकाली गयी. सबसे पहले जसोइया स्थित प्रतिमा स्थल पर चेतक घोड़े पर सवार महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया.
वहीं, से गाजे-बाजे के साथ सैकड़ों लोग हाथ में विजयी ध्वज लिये हुए शहर की तरफ चल पड़े. शोभायात्रा समाहरणालय के मुख्य द्वार, रमेश चौक, पुरानी सब्जी मंडी, जामा मसजिद होते हुए धर्मशाला चौक पहुंची. जहां गणपति मंदिर के समक्ष काफी समय तक ऐतिहासिक योद्धा की जयकारा लगाया गयी. यहीं से फिर यह शोभायात्रा वापस लौट गयी. युवा गर्जना संस्था द्वारा सदर अस्पताल में मरीजों के बीच फल वितरण किये गये. कार्यकर्ताओं ने रक्तदान भी किया.
सदर अस्पताल में ही सदर अनुमंडल पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद पहुंचे और युवा गर्जना के कार्यकर्ताओं के उत्साह को बढ़ाया. इस अवसर पर आयोजित समारोह में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि वीरता की लिखी गयी भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप आज भी अमर है.
ये राष्ट्र के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी थी. इस लड़ाई में सभी वर्ग के लोगों ने सहयोग किया था, तभी तो मुगलों के विशाल सेना महाराणा की छोटी सी सैन्य बल के सामने टिक नहीं पाती थी. वीरों का इतिहास इस बात का साक्षी है कि महाराणा नहीं होते तो भारतीय संस्कृति नहीं बचती. महाराणा प्रताप के वीरता का स्वयं अकबर ने प्रशंसा किया था. महाराणा प्रताप के मृत्यु के उपरांत मुगल सल्लतनत बादशाह अकबर ने कहा था कि तुमने जो लड़ाई मुझसे लड़ी वह लड़ाई हम जीत कर भी हार गये. क्योंकि तुम्हारी वीरता का मैं कायल हूं. इस समारोह में मुख्य रूप से कृष्ण वल्लभ प्रसाद सिंह उर्फ बबुआजी, वार्ड पार्षद सतीश सिंह, समाजसेवी सिनेश सिंह, राम भूषण पांडेय, उज्जवल सिंह, दीपक कुमार, छात्र संघ के अध्यक्ष शशि कुमार, पुष्कर राठौर, निरंजन विद्यार्थी, आशुतोष सिंह, मोनू सिंह, राहुल कुमार सिंह, राजन सिंह, अमर केसरी, सोनू सिंह व सुभग पांडेय प्रमुख रूप से शामिल थे.
क्षत्रिय सेना ने भी किया महाराणा को याद : शहर में पूरे दिन जयंती की धूम रही. क्षत्रिय सेना ने भी महाराणा प्रताप की जयंती प्रतिमा स्थल पर धूमधाम से मनायी.
जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता रंजन सिंह ने किया. इस कार्यक्रम में क्षत्रिय महासंघ के राष्ट्रीय प्रचारक रामसकल सिंह चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप वीर पुरुष के साथ-साथ ऐतिहासिक पुरुष थे. सचिव नंदन सिंह, कार्यकारिणी मंत्री विकास सिंह, प्रकाश
कुमार, शमरेश कुमार सिंह, छात्र नेता आशुतोष कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष संजय सिंह, कुमार सोनू सिंह, अमरेंद्र कुमार सिंह, मनीष सिंह,आदित्य नारायण सिंह ने कहा कि आजदेश इस वीर पुरुष को याद कर गौरवांवित हो जाता है.

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