सोमवार की सुबह औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय की पड़ताल के दौरान मुकदमे की तारीख पर पहुंचे पूर्व मुखिया नागेंद्र सिंह ने न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर एतराज जताया. उन्होंने कहा कि केस के सिलसिले में व्यवहार न्यायालय आते रहता हूं. लेकिन, यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है.
किसी जिले के न्यायालय परिसरों में जब कोई बड़ी घटना होती है, तब अन्य न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी जाती है. जैसे ही मामला शांत होता है, वैसे ही पुरानी स्थिति बहाल हो जाती है. न्यायालय गेट पर लगे मेटल डिटेक्टर भी सही से काम नहीं कर रहे हैं. सीसीटीवी कैमरे भी न्यायालय में नहीं लगाये गये है, जो सुरक्षा की सबसे बड़ी चुक है. सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे लगाये जाने चाहिए, ताकि आने-जाने वालों पर नजर रखीं जाये. सुरक्षा की दृष्टिकोण से यह बेहद जरूरी है. न्यायालय के मुख्य द्वार सहित अन्य प्रवेश द्वारों पर गंभीरता से जांच होनी चाहिए. सुरक्षा बलों की संख्या भी बढ़ायी जानी चाहिए, ताकि न्यायालय में काम से पहुंचने वालेलोग अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके.
अवकाश प्राप्त शिक्षक व पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह कहते हैं कि न्यायालय की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए. इसी जगह से लोगों को न्याय मिलता है. हाल के दिनों में बक्सर, छपरा व वाराणसी में जिस तरह की घटनाएं हुईं, उससे न्यायालय की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है. जरा सी चूक बड़ी घटना का गवाह बन सकता है. जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक इस पर विशेष रूप से ध्यान दें. क्योंकि, जिस जगह से न्याय की उम्मीद होती है, वहां अन्याय की कोई जगह नहीं है.
