सड़क पर ही जब बाजार लगने लगे, तो आमलोगों को परेशानियों से गुजरना ही होगा़ क्योंकि, इससे सड़क जाम तो होना ही है. जब तक सड़क पर दुकान लगानेवाले व्यवसायी व इन व्यवसायियों से उपयोग की वस्तुएं खरीदने वाले आमलोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक स्थिति यही रहेगी.
औरंगाबाद (ग्रामीण) : सड़क पर ही जब बाजार सजने लगे, तो आमलोगों को परेशानियों से गुजरना कोई बड़ी बात नहीं है. इससे सड़क जाम तो होना ही है. जब तक सड़क पर दुकान लगानेवाले व्यवसायी व इन व्यवसायियों से उपयोग की वस्तु खरीदने वाले आमलोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक स्थिति यही रहेगी. रिसियप थाना क्षेत्र में पड़ने वाले सुंदरगंज बाजार प्रतिदिन जाम से कराह रहा है.
करीब आधे किलोमीटर के दायरे में बसा सुंदरगंज बाजार छोटा-मोटा ग्रामीण बाजार के रूप में जाना जाता है. लगभग चार दर्जन गांवों के लोगों के लिए सुंदरगंज बाजार बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. यहां सब्जी से लेकर कपड़े तक उपलब्ध हैं. लेकिन, इस बाजार में रौनक नाम की कोई चीज नहीं है. सब्जी वाले से लेकर पान बेचनेवाले तक अपनी दुकानें सड़क पर ही सजा कर बैठे रहते हैं.
इन्हें जरा भी चिंता नहीं कि कब वे दुर्घटना के शिकार हो जायेंगे या कब उनके कारण बाजार में जाम लग जाये. लगन के इस मौसम में जाम का नजारा इस बाजार में देखते ही बन रहा है.
संकीर्ण रास्ते में घंटों वाहनें फंसे रहती हैं. खासकर बाजार क्षेत्र में जाम से लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं. दूसरी बात यह है कि बाजार पथ पूरी तरह जर्जर है. छोटे वाहने भी गुजरती हैं, तो धूल का गुब्बारा उड़ता रहता है. इससे व्यवसायी समेत बाजार आनेवाले लोगों को काफी दिक्कत होती है.
सुंदरगंज बाजार से चतरा मोड़, सनथुआ मोड़, सिरिस व बारुण जानेवाले सभी पथ पूरी तरह जर्जर हैं. वैसे सुंदरगंज से माली जाने वाले पथ का निर्माण कार्य शुरू है. लेकिन, अन्य पथों में निर्माण कार्य होने की संभावना दूर-दूर तक दिखायी नहीं देती है. व्यवसायी सुरेश प्रसाद, मनोज गुप्ता, संजय कुमार, आलोक कुमार व सत्येंद्र प्रसाद कहते हैं कि सुंदरगंज बाजार पथ पर न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न संबंधित विभाग का.
