हसपुरा प्लस टू स्कूल के एक भी कमरे सही सलामत नहीं

हसपुरा प्लस टू स्कूल के एक भी कमरे सही सलामत नहीं फोटो नंबर-3, परिचय- जर्जर विद्यालय का भवनहसपुरा (औरंगाबाद).आजादी के पहले 1943 का प्लस टू हाइस्कूल, हसपुरा सरकारी उपेक्षा का शिकार है. 20 कमरेवाले इस विद्यालय में एक भी कमरा सुरक्षित नहीं है, जहां बैठ कर बच्चे पढ़ सके. यहां तक कि शिक्षकों काे भी […]

हसपुरा प्लस टू स्कूल के एक भी कमरे सही सलामत नहीं फोटो नंबर-3, परिचय- जर्जर विद्यालय का भवनहसपुरा (औरंगाबाद).आजादी के पहले 1943 का प्लस टू हाइस्कूल, हसपुरा सरकारी उपेक्षा का शिकार है. 20 कमरेवाले इस विद्यालय में एक भी कमरा सुरक्षित नहीं है, जहां बैठ कर बच्चे पढ़ सके. यहां तक कि शिक्षकों काे भी बैठने के लिए एक भी कमरे सही सलामत नहीं है. जबकि, इस विद्यालय में एक हजार से ऊपर बच्चों का नामांकन है. छात्रों की तुलना में शिक्षक भी कम है. प्लस टू का कोड तो मिला, लेकिन इंटर में एक भी छात्र-छात्राओं का नामांकन नहीं है. जबकि, इंटर स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी बहाल हैं. जबकि,एक समय ऐसा था कि जिले में हसपुरा हाइस्कूल शिक्षा के मामले में स्थान था. वह वजूद आज समाप्त हो गया. विद्यालय का अपना छात्रावास था, जहां बच्चे रहते थे. इस स्कूल से छात्र पढ़ कर आज देश-विदेश में हसपुरा का नाम रोशन कर रहे है. इस विद्यालय से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक राम कृपाल लाल वर्मा, जगदानंद लाल कर्ण, स्व सुरेश सिंह ने अपनी पहचान इस विद्यालय से ही बनायी है. विद्यालय प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य विजय कुमार अकेला बताते हैं कि वर्ष 2008 में विद्यालय भवन निर्माण के लिए 42 लाख रुपये आया था, लेकिन राजनीतिक दावं पेच में फंस कर रुपये लौट गये. जबकि 17 अक्तूबर 2008 को प्रबंधन समिति की बैठक में सर्वसम्मति से भवन निर्माण के लिए निर्णय लिया गया था.

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