कार्रवाई. पूर्व डीएलओ पर चार्जशीट गठित, डीएम ने जांच रिपोर्ट सरकार को भेजी
औरंगाबाद (कार्यालय) : वरीय उपसमाहर्ता व पूर्व जिला भू अर्जन पदाधिकारी (डीएलओ) विनोद कुमार पंकज के खिलाफ डीएम की कार्रवाई शुरू हो गयी है. डीएम ने पूर्व डीएलओ के खिलाफ चार्जशीट गठित कर दी है, जिसमें 15 आरोप लगाये गये हैं. डीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को भेज दी है.
मंगलवार को प्रेसवार्ता में डीएम ने बताया कि कि पूर्व डीएलओ विनोद कुमार पंकज भ्रष्टाचार में डूब कर मानसिक संतुलन खो बैठे थे. वे अपने दायित्व को निर्वहन नहीं कर पा रहे थे़ यही कारण है कि उन्होंने अपने कार्य अवधि में बीआरबीसीएल व एनपीजीसी जैसी प्रमुख परियोजनाओं की फाइलें को आठ माह से दबा कर रखा था़
जब भी उन्हें संबंधित फाइलों को निष्पादन करने के लिए निर्देश दिया गया, तो उनके द्वारा इसका पालन नहीं किया गया. जब इनसे स्पष्टीकरण पूछा गया तो वे जवाब नहीं दे सके, क्योंकि वे जानते थे कि जवाब देने के बाद उनपर कार्रवाई होगी. यही कारण है कि वे नाटकीय ढंग से नगर थाना पहुंच गये और मीडिया के समक्ष कई तरह के बयान दिये.डीएम ने कहा कि पूर्व डीएलओ वरीय पदाधिकारी को दिग्भ्रमित कर पद का दुरुपयोग करना चाह रहे थे. बिना फाइलों को पढ़े उन्होंने आठ माह से इनको रोक कर रखा था.
जब वे बुरी तरह फंस गये, तो बेवजह आरोपों का सहारा लिया. लेकिन, हकीकत यह है कि वे बिजली घर परियोजना के कामकाज में बाधा पहुंचाना चाह रहे थे. जब मामला बिगड़ गया, तो मीडिया के समक्ष उनके (डीएम) पर आधारहीन आरोप लगाया. आरोप की जांच जब अपर समाहर्ता सुरेश प्रसाद साह व गोपनीय पदाधिकारी सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी राम अनुग्रह सिंह से करायी गयी, तो सब कुछ स्पष्ट हो गया. डीएम ने उस घड़ी का भी जिक्र किया जिस समय विनोद पंकज ने दुर्व्यवहार करने का आरोप उनपर लगाया था.
डीएम ने कहा कि उस वक्त बैठक में बैठे 25 पदाधिकारी साक्षी हैं. जांच रिपोर्ट में 15 पदाधिकारियो ने पूर्व डीएलओ के विरुद्ध हस्ताक्षर किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व डीएलओ को चाहिए था कि थाना में न जाकर, आयोग में जाये. लेकिन, उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ था और नाटकीय रूप से उन पर आरोप लगाया. आरोप पूरी तरह मनगढंत था.
उन पर (डीएम) झूठा आरोप लगा कर पूर्व डीएलओ ने अनुशासन का उल्लंघन किया है. श्री पंकज का यह नाटक सिर्फ इसलिए था कि वे समझौते के लिए तैयार हो जायें. लेकिन, वे बिजली घर जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं के हित में कार्य करना चाह रहे थे, जिसका पूर्व डीएलओ समाधान न कर, गतिरोध उत्पन्न करना चाहते थे.
