महज 5 की उम्र में औरंगाबाद की श्रुति का अद्भुत टैलेंट, बिना अटके करती हैं शिव तांडव और रुद्राष्टकम का पाठ

पांच साल की उम्र में जहाँ बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं श्रुति तिवारी रुद्राष्टकम और शिव तांडव जैसे संस्कृत स्तोत्रों का धाराप्रवाह पाठ करती हैं. एलकेजी की छात्रा श्रुति की इस विलक्षण प्रतिभा ने सबको हैरान कर दिया है.

5-year Shruti BalPratibha : पांच साल की उम्र में जहां बच्चे छोटी-छोटी कविताएं और पाठ याद करने की कोशिश करते हैं, वहीं औरंगाबाद की श्रुति तिवारी रुद्राष्टकम और शिव तांडव जैसे संस्कृत स्तोत्रों का धाराप्रवाह पाठ करती हैं. कर्मा रोड स्थित आदर्श कॉलोनी की रहने वाली श्रुति को हनुमान चालीसा समेत कई संस्कृत के भजन और स्तोत्र भी जुबानी याद हैं. खास बात यह है कि वह इनका पाठ बिना किसी झिझक के करती हैं.

चार साल की उम्र से शुरू हुआ धार्मिक पाठ

श्रुति ने महज चार साल की उम्र से धार्मिक पाठ पढ़ना शुरू किया. धीरे-धीरे उनका अभ्यास बढ़ता गया और अब वह संस्कृत के कई कठिन पाठ भी सहजता से पढ़ लेती हैं. इतनी कम उम्र में उनकी इस प्रतिभा को देखकर परिवार के साथ आसपास के लोग भी हैरान हैं.

तीन साल की उम्र में मां के साथ जाती थीं पूजा में

श्रुति की मां वसुंधरा तिवारी बताती हैं कि जब श्रुति करीब तीन साल की थी, तब वह उनके साथ पूजा-पाठ में जाने लगी थी. मां को पूजा करते और धार्मिक पाठ करते देखकर श्रुति का भी धीरे-धीरे पूजा-पाठ और संस्कृत के श्लोकों के प्रति लगाव बढ़ता गया. यही रुचि आगे चलकर उसकी आदत का रूप लेती गयी.

धार्मिक स्तोत्रों के प्रति बढ़ता गया लगाव

पूजा-पाठ और संस्कृत के श्लोकों के प्रति बढ़ती रुचि के साथ श्रुति ने धार्मिक पाठ का अभ्यास जारी रखा. अब रुद्राष्टकम, शिव तांडव और हनुमान चालीसा समेत कई भजन और स्तोत्र उन्हें याद हैं. वह इनका पाठ धाराप्रवाह करती हैं.

एलकेजी की छात्रा हैं श्रुति

श्रुति के पिता उदय तिवारी हैं. वह कर्मा रोड स्थित आदर्श कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं. श्रुति ग्रैंड व्यू एकेडेमी स्कूल, आदर्श कॉलोनी में एलकेजी की छात्रा हैं.

कम उम्र में संस्कृत पाठ ने खींचा ध्यान

पांच साल की उम्र में धार्मिक ग्रंथों और संस्कृत स्तोत्रों के प्रति श्रुति की रुचि इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. रुद्राष्टकम और शिव तांडव जैसे कठिन स्तोत्रों का वह बिना झिझक पाठ करती हैं.

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By रागिनी शर्मा

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