काला पानी की तरह है इगुना गांव

औरंगाबाद (नगर) : जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा इगुना गांव कई वर्षो से काला पानी की तरह सजा भुगत रहा है. इस गांव में न तो विद्यालय है और न ही आने–जाने के लिए सड़क. इस गांव की आबादी एक हजार के आसपास है. इगुना गांव के लोग पगडंडी के सहारे […]

औरंगाबाद (नगर) : जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा इगुना गांव कई वर्षो से काला पानी की तरह सजा भुगत रहा है. इस गांव में तो विद्यालय है और ही आनेजाने के लिए सड़क.

इस गांव की आबादी एक हजार के आसपास है. इगुना गांव के लोग पगडंडी के सहारे कीचड़ में सन कर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं.

गांव की स्थिति यह है कि बरसात के दिन में इस गांव की नयी नवेली दुल्हन मायके चली जाती है. गांव में जाने वाली सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि दो फुट से अधिक सड़क पर कीचड़ है. जब भी कोई ग्रामीण जिला मुख्यालय आता है, तो पहनने वाला कपड़ा जूताचप्पल हाथ में लेकर दो किलोमीटर तक चलता है.

आगे अकार नदी में हाथपैर धोने के बाद कपड़ा चप्पल को पहनते हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा हैं कि यदि सड़क नहीं बनाया गया तो विवश होकर उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.

सभी को दिये आवेदन

ग्रामीण रंजय मेहता, सुरेंद्र मेहता, महेंद्र रजक, बबन चौहान, फगुनी मेहता, रमेश साव, उपेंद्र मेहता, सरयू साव, प्रवेश चौहान, प्रदीप मेहता, लक्ष्मण रजक, प्रमोद मेहता, शिव कुमार मेहता, रामाशीष साव, मिथिलेश रजक प्रकाश कुमार, यमुना प्रसाद आदि ने बताया कि कई बार सड़क बनाने के लिए डीएम से लेकर विधायक मुखिया तक को आवेदन दिया. बावजूद सड़क नहीं बनी. इससे विवश होकर अब श्रमदान से सड़क बनाने को मजबूर हैं, ताकि बरसात के दिन में रास्ता चालू हो सके.

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