चिल्हकी के ग्रामीणों ने बांस-बल्ला लगा कर बनाया अस्थायी पुल

अंबा : प्रखंड मुख्यालय अंबा से सटे चिल्हकी गांव के लोगों ने सोमवार को बतरे नदी में बांस के चचरी का अस्थायी पुल का निर्माण किया. ग्रामीणों ने दोनों किनारों पर मोटे लकड़ी गाड़ कर ऊपर से बांस-बल्ला देकर आवागमन करनें लायक बनाया. ग्रामीणों ने कहा कि हम वर्षों से जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा झेल रहे […]

अंबा : प्रखंड मुख्यालय अंबा से सटे चिल्हकी गांव के लोगों ने सोमवार को बतरे नदी में बांस के चचरी का अस्थायी पुल का निर्माण किया. ग्रामीणों ने दोनों किनारों पर मोटे लकड़ी गाड़ कर ऊपर से बांस-बल्ला देकर आवागमन करनें लायक बनाया. ग्रामीणों ने कहा कि हम वर्षों से जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा झेल रहे है. नदी में पानी आने पर दो किमी की दूरी घुम कर अंबा बाजार जाना पड़ता है, जबकि अंबा कि दूरी महज 500 मीटर है.

जनप्रतिधियों द्वारा छल्का या पुल नहीं बनाये जाने से ग्रामीणों के चेहरे पर असंतोष है. वे हर वर्ष हजारों रुपये लगाकर आवागमन के लिए अस्थायी पुलिया का निर्माण कराते है. आम सहयोग से बनाया गया बांस का छलका नदी में पानी आते ही धारा में बह जाता है. गांव के नरसिंह पांडेय, रामनंदन शर्मा, जीतू पांडेय, गुप्तेश्वर राम, संतोष पासवान, भोलु पांडेय आदि ने बताया कि स्थानीय विधायक राजेश कुमार को अंबा पेट्रोल पंप की गली से नदी में छल्का बनाने की मांग की.
ग्रामीणों की मांग पर स्थल देखकर विधायक ने छल्का बनवाने का आश्वासन दिया पर अब तक निर्माण संबंधी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इधर, विधायक ने बताया कि चिल्हकी गांव के समीप पुल या छलका निर्माण के लिए विभाग को लिखा गया है. विभाग द्वारा इसका सर्वे कर सरकार को रिपोर्ट भेजा गया है. इधर, नेउरा सूर्यमल गांव के लोग भी प्रतिवर्ष बटाने नदी में अस्थायी छलके का निर्माण करते हैं.
यहां के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया, पर अब तक निर्माण नहीं कराया गया है. इस बार लोकसभा चुनाव में नेउरा सूर्यमल गांव के लोगों ने वोट बहिष्कार भी किया था. इसके बाद भी न तो प्रशासन की ओर से और न ही जनप्रतिनिधियों द्वारा निर्माण कार्य की कोई पहल की गयी. इधर, पुलिया नहीं होने से लभरी खुर्द गांव के लोगों को भी आवागमन में परेशानी होती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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