नियमित टीकाकरण में शामिल होगा रोटा वायरस

औरंगाबाद नगर : रोटा वायरस वैक्सीन को तीन जुलाई से नियमित टीकाकरण में शामिल किया जायेगा. यह वैक्सीन रोटा वायरस के कारण बच्चों में होने वाले गंभीर दस्त से सुरक्षा प्रदान करेगा. बच्चों में यह टीका जन्म से 6वां सप्ताह से शुरू किया जाता है. अबतक देश के ग्यारह राज्यों में इसे सफलता पूर्वक लागू […]

औरंगाबाद नगर : रोटा वायरस वैक्सीन को तीन जुलाई से नियमित टीकाकरण में शामिल किया जायेगा. यह वैक्सीन रोटा वायरस के कारण बच्चों में होने वाले गंभीर दस्त से सुरक्षा प्रदान करेगा. बच्चों में यह टीका जन्म से 6वां सप्ताह से शुरू किया जाता है. अबतक देश के ग्यारह राज्यों में इसे सफलता पूर्वक लागू किया जा चुका है.

इसको लेकर कार्यपालक निदेशक राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार ने राज्य के सभी डीएम एवं सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया है. राज्य में तीन जुलाई से नियमित टीकाकरण के अंतर्गत रोटावायरस वैक्सीन को शामिल किया जाना प्रस्तावित है. इसके लिए राज्य स्तर पर प्रत्येक जिले से मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जा चुका है. इससे बच्चों में रोटावायरस की वजह से होने वाली दस्त में कमी लाई जा सकेगी.
साथ ही इसके कुशल कार्यान्वयन के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों के विषय में भी विस्तार से जानकारी दी गई है. जिले के प्रत्येक प्रखंड से पांच प्रतिभागियों को जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को शामिल किया जायेगा. स्वास्थ्य विभाग से पीएचसी अधीक्षक, एक मेडिकल ऑफिसर, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाईजर एवं समाज कल्याण विभाग से सीडीपीओ शामिल होंगे.
साथ ही इसमें मेडिकल कॉलेज एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के भी प्रतिनिधियों को शामिल किया जायेगा. जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स का आयोजन कर कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण की समीक्षा की जायेगी, ताकि संभावित त्रुटियों को दूर कर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके. इस नये टीके के विषय में आम-जागरूकता फैलाने पर भी विशेष बल दिया जायेगा.
तीन चरणों में शिशु को लगेगा वैक्सीन
जिला स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके पदाधिकारियों द्वारा प्रखंड स्तर पर आशा, आंगनबाड़ी एवं टीकाकरण संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया जायेगा. प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण की मॉनीटरिंग के लिए अलग से वेबसाइट भी बनाया गया है, जिस पर मॉनीटरिंग प्रतिवेदन अपलोड किए जायेंगे.
भारत सरकार ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में रोटावायरस वैक्सीन को देश में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ नवल किशोर सिंह ने कहा कि रोटावायरस एक अत्यंत संक्रामक वायरस है, जो बच्चों में होने वाले 40 फीसद डायरिया के लिए जिम्मेदार है. रोटावायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे जाकर गंभीर रूप ले सकती है.
पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है तथा कुछ मामलों में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है. रोटावायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियां भी होती हैं और कभी-कभी पेट में दर्द भी होता है. दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग तीन से सात दिनों तक रहते हैं. इस गंभीर रोग की रोकथाम में जिंक और ओआरएस के साथ ही साथ रोटावायरस वैक्सीन काफी प्रभावी होगा तथा शिशुओं को यह वैक्सीन तीन चरणों में दिया जायेगा. पहला टीका जन्म के छह सप्ताह पर, दूसरा टीका दस सप्ताह पर एवं आखिरी टीका 14 सप्ताह पर दिया जायेगा.

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