रेफरल अस्पताल के विकास पर खर्च होंगे 12.77 लाख रुपये
आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम योजना के अंतर्गत डीएम ने दी प्रशासनिक स्वीकृति
BySUJIT KUMAR|
आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम योजना के अंतर्गत डीएम ने दी प्रशासनिक स्वीकृति
औरंगाबाद/अंबा. आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार से प्राप्त पुरस्कार राशि से शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की पहल की जा रही है. इसी क्रम में डीएम अभिलाषा शर्मा ने कुटुंबा रेफरल अस्पताल में कार्य कराने के लिए 12 लाख 77 हजार रुपये की स्वीकृति दी है. डीएम ने भवन निर्माण विभाग को कार्य संपादन की जिम्मेदारी सौंपी है. उक्त राशि से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुटुंबा परिसर में ट्रैग रूम, एनसीडी कॉर्नर एवं टीबी लैब का जीर्णोद्धार कार्य कराया जायेगा. अस्पताल परिसर में एनसीडी कॉर्नर के निर्माण पर चार लाख 34 हजार रुपये खर्च किये जायेंगे. वहीं, ट्रैग रूम के लिए तीन लाख 77 हजार 600 रुपये तथा लैब रूम, टीबी वार्ड एवं फ्लोर सीलिंग के कार्य पर चार लाख 65 हजार 400 रुपये की लागत निर्धारित की गयी है. स्वीकृति आदेश के साथ ही निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए 50 प्रतिशत राशि विमुक्त कर दी गयी है. जानकारी के अनुसार, आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के तहत जिले को एक करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है. इस राशि से अस्पतालों के साथ-साथ उच्च विद्यालयों में पुस्तकालय को सुदृढ़ करने की भी पहल की जा रही है. ज्ञात हो कि नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत पिछले माह एक करोड़ चार लाख 88 हजार 100 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. इस राशि से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवीनगर, देव, गोह, हसपुरा, बारुण, रफीगंज व मदनपुर में मरीजों व उनके परिजनों के बैठने के लिए वेटिंग रूम, आशा के लिए वेटिंग रूम तथा शौचालय का जीर्णोद्धार कराया जाना है.
चिकित्सक, कर्मी और संसाधन की कमी से जूझ रहा कुटुंबा अस्पताल
रेफरल अस्पताल कुटुंबा में चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी एवं संसाधनों की भारी कमी है. प्रभात खबर द्वारा अस्पताल में व्याप्त इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था. डीएम द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दिये जाने से संसाधनों के बेहतर होने की उम्मीद जगी है. इससे इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों और कर्मियों को भी काफी सहूलियत मिलेगी.
क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नवल किशोर सिंह ने बताया कि चिकित्सक, कर्मी एवं संसाधन की कमी से विभाग को अवगत कराया गया है. विभाग द्वारा उपलब्धता के अनुसार चिकित्सकों की पदस्थापना की जा रही है. साथ ही संसाधनों को बेहतर बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है. विभाग द्वारा अस्पताल भवन का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य कराये जाने से मरीजों के इलाज में काफी सहूलियत होगी.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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