सुजीत कुमार सिंह
औरंगाबाद : दो तरफ से अंगरेजी शराब की दुकान. ठीक सामने मीट, मुरगा और मछली की दुकान, बगल में तसेड़ियों का जमावड़ा और ठीक बीच में आधे दर्जन खान-पान की होटल. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस जगह पर मयखाने की फैक्टरी चलती है. यह नजारा नगर थाना से महज 20 गज की दूरी पर दिखता है. यानी सब्जी मंडी के भीतर. सच कहा जाये तो इस नजारे को चार चांद लगाने में कुछ पुलिसकर्मी भी सहयोग करते है. यही कारण है कि बिना डर-भय के अवैध कारोबार का संचालन हो रहा है.
औरंगाबाद शहर में दो सब्जी मंडी है. दोनों मंडी में सुबह-शाम लोग सब्जी व फल खरीदने भारी तादाद में पहुंचते है. लेकिन, इन मंडियों में शराब की दुकान और होटलों में खुलेआम परोसी जा रही शराब व झूमते शराबियों से भयभीत रहते है. प्रतिदिन दोपहर के बाद यहां मेला सा नजारा दिखता है. हालांकि दुकान खुलते ही शराबी पहुंचने लगते हैं,लेकिन, दोपहर के बाद रेस हो जाते हैं.
शराब पीने और पिलाने का दौर देर रात तक चलती है. नगर थाने के समीप वाली सब्जी मंडी का तो कहना ही नहीं. यहां के होटल संचालक समझते है कि ‘जब सैंया भये कोतवाल तो अब डर काहे का.’ यानी कि इन होटलों के संचालन में कहीं न कहीं पुलिस कर्मियों का सहयोग प्राप्त है. वैसे कई बार देखा गया है कि कुछ पुलिस कर्मी भी आम लोगों के साथ जाम से जाम टकराते हैं. अगर इसका प्रमाण देखना है तो इन होटलों में देखा जा सकता है. नगर थाने में ही कार्यरत कुछ कर्मी अपनी प्यास मिटाने के लिए पानी की जगह शराब का इस्तेमाल करते है, वह भी इन्हीं होटलों में जाकर.
