अभी हर पार्टी के नेता जीत रहे चुनाव

औरंगाबाद (ग्रामीण) : औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में 10 अप्रैल को ही लोकसभा चुनाव संपन्न हो गया. लेकिन जब तक मतगणना नहीं हो जाती, तब तक जीत-हार का चर्चा होती रहेगी. 16 मई को मतगणना होगी. इसकी तैयारी भी औरंगाबाद प्रशासन ने कर ली है. चुनाव के पहले चर्चा परवान पर था. अब हार-जीत की चर्चा […]

औरंगाबाद (ग्रामीण) : औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में 10 अप्रैल को ही लोकसभा चुनाव संपन्न हो गया. लेकिन जब तक मतगणना नहीं हो जाती, तब तक जीत-हार का चर्चा होती रहेगी. 16 मई को मतगणना होगी. इसकी तैयारी भी औरंगाबाद प्रशासन ने कर ली है.

चुनाव के पहले चर्चा परवान पर था. अब हार-जीत की चर्चा सरेआम हो रही है. किसी भी पार्टी के प्रत्याशी हार मानने को तैयार नहीं. इनसे ज्यादा कार्यकर्ताओं की फिक्र है. समर्थकों का तो कहना ही नहीं. हर रोज विधानसभावार चर्चा हो रही है. शहर के एक चौराहे पर मंगलवार को चुनाव की चर्चा छिड़ी थी. भाजपा, कांग्रेस, जदयू व दो स्वतंत्र प्रत्याशी के समर्थक एक साथ चाय की चुस्की ले रहे थे.

इसी बीच समर्थकों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को मिले मतदान पर बहस छेड़ दी. एक समर्थक ने कहा, हमारे प्रत्याशी टिकारी से लगभग 15 हजार वोट से लीड करेंगे. इतना बोलते ही दूसरे समर्थक ने उसकी बात काट दी. कहा कि, वहां तो हमारे प्रत्याशी लीड कर रहे है. गुरुआ विधानसभा क्षेत्र से भी भारी बहुमत मिलेगी. इमामगंज व कोच के मतदाताओं ने दिल खोल कर मतदान किया है. इतने पर स्वतंत्र प्रत्याशी के समर्थक कहां चुप रहते, उसने कहा कि भ्रष्टाचार व महंगाई के लिए भाजपा, जदयू, कांग्रेस जिम्मेवार है.

जनता जनार्दन ने हमारे प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया है. यानी कि अभी हर पार्टी के नेता चुनाव जीत रहे हैं. यह तो समय ही बतायेगा कि कौन जीतेगा. लेकिन चुनावी चर्चा के बीच ऐसा लग रहा है कि इस बार एक नहीं कई प्रत्याशी जीतेंगे.

जातीय समीकरण पर भी हो रही है चर्चा

चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी मतदान के बाद मौन है. प्रत्याशी जानते हैं कि कहां के मतदाताओं से उनको मत मिला है. लेकिन समर्थकों के हिसाब से जातीय समीकरण अहम रौल निभा रही है. भाजपा के एक समर्थक ने कहा कि हर जगह मोदी की लहर दिखी. दूसरे पार्टी के मतदाताओं ने भी मोदी को अपना मतदान किया.

सवर्ण,वैश्य व अतिपिछड़ा का वोट हमें मिला है. अन्य जातियों के लोगों ने भी दिल खोल कर मतदान किया. इसी पर कांग्रेस समर्थक ने भाजपा समर्थक को टोकते हुए कहा कि इस बार औरंगाबाद में सवर्णो का वोट हमें मिला. माय समीकरण तो पक्ष में था ही. इस तरह की चुनावी चर्चा अभी भी समय काटने का एक बहाना बन गया है. सुबह व शाम का वक्त काटने पर भारी पड़ता है तो ऐसी चर्चाएं अचानक निकल पड़ती है व समीकरण का जोड़ घटाव होना शुरू हो जाता है.

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