अरवल: करोड़ों की लागत के बाद भी पंचायतों में कचरा प्रबंधन योजना ठप, ₹30 शुल्क विवाद व वेतन न मिलने से सड़कों पर लगा कचरे का अंबार

अरवल जिले में करोड़ों की लागत से शुरू हुई ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना तीन साल में ही चरमरा गई है. ₹30 मासिक उपयोगकर्ता शुल्क और बजट की कमी के चलते जिले की आधे से अधिक पंचायतों में कचरा उठाव पूरी तरह ठप है. सफाई कर्मियों को वेतन न मिलने से वे भी हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे गांवों की गलियां और खेत कचरे से भर गए हैं.

Arwal News: जिले की पंचायतों में लगभग तीन वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) योजना पूरी तरह चरमरा गई है. योजना के तहत घर-घर डस्टबिन वितरण, ई-रिक्शा, कचरा ढोने वाले ठेले की खरीद, सफाई कर्मियों की बहाली और अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों (WPU) का निर्माण कराया गया था. लेकिन महज 30 रुपये मासिक उपयोगकर्ता शुल्क (User Charge) और बजट के अभाव में जिले की आधे से अधिक पंचायतों में कचरा उठाव का कार्य महीनों से पूरी तरह ठप पड़ा है. गांवों की गलियों, नालियों और खेतों में कचरे का अंबार लगा हुआ है.

सफाई कर्मियों को नहीं मिला वेतन, कार्य किया बंद

योजना के प्रावधानों के अनुसार, सफाई कर्मियों के मानदेय भुगतान के लिए प्रत्येक घर से 30 रुपये मासिक शुल्क संग्रह करना था तथा शेष राशि का भुगतान 13वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि से किया जाना था. लेकिन ग्रामीणों से शुल्क वसूली न होने और वित्त आयोग मद में राशि की कमी के कारण सफाई कर्मियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिल सका है. भुखमरी की कगार पर पहुंचे अधिकांश सफाई कर्मियों ने कचरा उठाना बंद कर दिया है.

जंग खा रहे ई-रिक्शा और ठेले, डस्टबिन टूटे

पिछले छह महीनों से नियमित उठाव बंद होने के कारण खरीदे गए लाखों रुपये के संसाधन बर्बाद हो रहे हैं:

  • ई-रिक्शा व ठेले: देखरेख और मरम्मत के अभाव में ई-रिक्शा बंद पड़े हैं, जबकि कचरा उठाने वाले हाथ-ठेले खुले में पड़े-पड़े टूट रहे हैं. कुछ कर्मी इन ठेलों का उपयोग निजी कार्यों में कर रहे हैं.
  • डस्टबिन क्षतिग्रस्त: घरों में बांटे गए नीले और हरे रंग के डस्टबिन टूट चुके हैं.
  • अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (WPU): पंचायतों में बने आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र अब अनुपयोगी साबित हो रहे हैं. यहां कचरा न पहुंचने से जैविक खाद बनाने की पूरी योजना अधर में लटक गई है. कई स्थानों पर ये भवन असामाजिक तत्वों व जुआरियों का अड्डा बन गए हैं या फिर निजी उपयोग में लाए जा रहे हैं.

लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई: उप विकास आयुक्त

मामले पर संज्ञान लेते हुए अरवल के उप विकास आयुक्त (DDC) शैलेश कुमार ने कहा कि स्वच्छता ग्राहियों के भुगतान की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन वार्डों में कचरे का उठाव नियमित रूप से नहीं हो रहा है, वहां जांच कराकर संबंधित स्वच्छता ग्राहियों और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

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By निशिकांत सिंह

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