Fish Farming Subsidy : विलुप्त हो रही देशी मछलियों को राज्य सरकार संरक्षण देगी. अरवल जिले में नदियों तलाबों, आहर और नहर से देसी मछली विलुप्त होने के कगार पर है. देसी प्रजाति की सिंधी, मांगुर, रेवा, बामी, गोछड़ा जैसी मछलियों का उत्पादन घटने से बाजार में मांग अधिक होने से इसके भाव में भी तेजी रहती है.
गर्मी में नदियों के जलस्तर में कमी तथा किसानों द्वारा कृषि कार्य में अधिक मात्रा में रासायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग करने से बरसात सहित अन्य स्रोतों से बहकर नदियों और आहर में पहुंच जाता है. इस कारण भी नदियों से देसी मछली विलुप्त हो रही है.
जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी आशुतोष आनंद ने बताया कि 15 जुलाई से 15 अगस्त तक मछलियों का प्रजनन का समय होता है. इन दिनों बड़ा पैमाने पर मछली मारा जाता है. जिससे भी देसी मछली की कमी हो गई है. देसी मछलियों के पालन के लिए सरकार ने योजना शुरू की है. जिसमें अरवल का भी चयन हुआ है. देशी मछली के पालन के लिए मत्स्य प्रजाति विविध प्रोत्साहन योजना विभाग चल रहा है. जिसमें देसी मछली पालन करने वाले मत्स्य पलकों को अनुदान भी दिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि देसी मछली पालन करने वाले लोगों को लागत के 60 प्रतिशत तक अनुदान विभाग से मिलता हैं. इसके लिए आवेदन शुरू है.
सिर्फ ऑनलाइन होंगे आवेदन
इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे. इच्छुक किसान और मत्स्य पालक मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कर आवेदन कर सकते हैं. विभाग ने ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं रखी है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.
31 अगस्त तक है आवेदन की अंतिम तिथि
योजना का लाभ लेने के लिए 31 अगस्त तक आवेदन करना होगा. निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. विभाग ने समय रहते आवेदन करने की सलाह दी है ताकि पात्र लाभार्थी योजना का लाभ उठा सकें.
देसी मछलियों के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार का मानना है कि इस योजना से जहां एक ओर विलुप्त होती देसी मछलियों का संरक्षण होगा. वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. इसके लिए उन्नत हैचरी तकनीक से तैयार गुणवत्तापूर्ण मछली बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे मत्स्य उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों में वृद्धि होगी.
देशी मछली बिलुप्त होने से मछुआरों का रोजगार पर संकट
नदी, नहर, नाले, आहर से देसी मछली विलुप्त होने के कारण स्थानीय मछुआरों का रोजगार खत्म हो रहा है. शिकार माही करने वाले जीतन साव, मोती बिन्द, छोटू साहनी ने बताया कि नदी, नाला से मछली मारकर जीविका चलाते हैं. दो-तीन वर्ष पहले बरसात में 2 घंटे में ही पर्याप्त मछली मिल जाता था. लेकिन अब दिन रात मेहनत करने पर भी तीन से चार किलो मछली पकड़ पाते हैं. मछली की भारी कमी हो गई है यही हाल रहा तो सैकड़ो मछली पकड़ने वाले लोगों का रोजगार खत्म हो जाएगा.
