जहानाबाद से आशुतोष की रिपोर्ट
Johan Ram Jehanabad : सादा जीवन, ऊंचे विचार और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करने वाले जनसंघ-भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता जोहन राम का रविवार को निधन हो गया. लगभग नौ दशक के जीवन में उन्होंने गरीबी और अभाव को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि विचार और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को ही अपनी पहचान बनाया. उनके निधन के साथ ही मगध की राजनीति में जनसंघ के दौर से चली आ रही एक समर्पित राजनीतिक परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया. मखमीलपुर स्थित पुनपुन नदी के तट पर कोईलीघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया.
लगभग 15 अगस्त 1946 में करपी बस स्टैंड के समीप एक अत्यंत गरीब रविदास परिवार में जन्मे जोहन राम बचपन से ही सामाजिक बदलाव के हिमायती रहे. युवा अवस्था में ही वे जनसंघ से जुड़ गए और जीवन के अंतिम पड़ाव तक संगठन तथा विचारधारा के प्रति निष्ठावान बने रहे. वरिष्ठ नेता कैलाशपति मिश्र के सानिध्य में काम करते हुए उन्होंने मगध की राजनीति में अपनी अलग पहचान कायम की.
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दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा, हार ने नहीं तोड़ा हौसला
जोहन राम का राजनीतिक जीवन संघर्ष और जुझारूपन की मिसाल रहा. 1972 में मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र से जनसंघ के टिकट पर ‘दीया’ चुनाव चिन्ह के साथ उन्होंने चुनाव लड़ा. मामूली मतों के अंतर से पराजित होने के बाद भी उन्होंने राजनीतिक संघर्ष जारी रखा. इसके बाद 1980 में भाजपा के टिकट पर बोधगया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे. इस चुनाव में भी मामूली मतों से हार मिली, लेकिन चुनावी पराजय उनके संकल्प को डिगा नहीं सकी.
पंचायती राज में भी रहा सक्रिय योगदान
वर्ष 2001 में जहानाबाद जिले के काको भाग-2 से जिला परिषद सदस्य निर्वाचित होकर उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई. वर्ष 2006 में अरवल जिले के वंशी क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य निर्वाचित हुए और बाद में अरवल जिला परिषद के उपाध्यक्ष भी बने. उम्र बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण बाद के वर्षों में उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित हो गई, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम के प्रति उनकी सजगता अंतिम समय तक बनी रही.
अटल जी से लेकर आडवाणी-जोशी तक की यादें साथ रहीं
जोहन राम के साथ लंबे समय तक कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले मुन्ना शर्मा बताते हैं कि बाथे नरसंहार के बाद तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी पटना आए थे. बाथे जाने से पहले उनसे मिलने के लिए नेताओं की भीड़ में जोहन राम भी मौजूद थे. उसी दौरान अटल जी ने उन्हें पहचानते हुए कहा था - “जोहन जी, आपके जिले में ही नरसंहार की दुखद घटना घटी है ना?” यह प्रसंग जोहन राम जीवनभर याद करते रहे.
मुन्ना शर्मा के अनुसार, बिहार के तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी जब जहानाबाद होते हुए गया जा रहे थे, तब सड़क किनारे खड़े जोहन राम को देखकर राज्यपाल की गाड़ी अचानक रुक गई. भंडारी ने गाड़ी से उतरकर उनसे कुशलक्षेम पूछा. संगठन के बड़े नेताओं से उनके ऐसे अनेक आत्मीय संस्मरण उनके राजनीतिक जीवन की पूंजी रहे.
रामनाथ कोविंद के साथ भूंजा खाने की भी है याद
जोहन राम के नाती एवं जदयू नेता कलेन्द्र राम बताते हैं कि नाना अपने राजनीतिक जीवन के संस्मरण बड़े गर्व और आत्मीयता से सुनाया करते थे. वे बताते थे कि जब रामनाथ कोविंद भाजपा के दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब वे बिहार प्रदेश दलित मोर्चा से जुड़े हुए थे. एक कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठकर भुंजा खाया था. वे अक्सर अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कैलाशपति मिश्र और सुशील कुमार मोदी के साथ बिताए अपने संस्मरण साझा किया करते थे.
अंतिम दिनों में भी राजनीति पर थी पैनी नजर
पूर्व जिला पार्षद आनंद कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि जीवन के अंतिम कुछ वर्षों से जोहन राम काफी अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन देश और बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम पर उनकी नजर लगातार बनी रहती थी. बिहार में भाजपा के सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की थी.
उन्होंने कहा कि जोहन राम ऐसे कार्यकर्ता थे, जिन्होंने राजनीति को कभी व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं बनाया. गरीबी रही, चुनावी हार मिली, परिस्थितियां बदलीं, उम्र ने शरीर को कमजोर किया, लेकिन विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति उनका विश्वास कभी कमजोर नहीं हुआ.
एक दौर की राजनीति का जीवंत दस्तावेज थे जोहन राम
जोहन राम का जीवन इस बात की मिसाल रहा कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि विचार, सिद्धांत, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण का भी नाम है. जनसंघ के शुरुआती दौर से लेकर भाजपा के विस्तार तक उन्होंने अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे और अपने हिस्से का संघर्ष पूरी निष्ठा से किया.
उनका जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि मगध की उस पीढ़ी के विदा होने जैसा है, जिसने सीमित संसाधनों में विचारधारा को अपना जीवन बना लिया था. उनके निधन की खबर सुनकर उनके पार्थिव शरीर पर पूर्व सांसद डॉक्टर अरुण कुमार, स्थानीय विधायक पप्पू वर्मा, पूर्व विधान परिषद सदस्य राधा मोहन शर्मा समेत कई लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया.
वहीं भाजपा विधायक मनोज शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी, पूर्व जिला अध्यक्ष राधाकांत शर्मा, राम विनय शर्मा, रामसुंदर शर्मा, जयशंकर प्रसाद, भास्कर कुमार सहित कई लोगों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है.
