Arwal News: (निशिकांत) अरवल जिले में इन दिनों सूरज आग उगल रहा है. पछुआ हवा के साथ भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. रविवार को अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सुबह 8 बजे के बाद ही सूरज की तपिश और लू का असर महसूस होने लगता है जिससे दोपहर तक सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है.
जरूरी काम सुबह या शाम में निपटा रहे लोग
लोग जरूरी कामों को सुबह-सुबह निपटाने की कोशिश करते हैं या शाम के बाद ही बाहर निकलते हैं. जेठ की इस झुलसाती गर्मी में लोग घरों में पंखों और कूलरों के सहारे दुबके रहने को मजबूर हैं. खासकर वृद्ध, बच्चे और बीमार लोगों के लिए यह मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है.
स्कूल से लौटते बच्चों की हालत खराब
स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. दोपहर में जब वे स्कूल से लौटते हैं तो उनके चेहरे गर्मी से तपे हुए और थके नजर आते हैं. गांवों में छोटे-छोटे तालाब और पोखर सुख चुके है जंगली पशुओं और पक्षियों के लिए भी इसमें पानी नहीं बचा है जिससे पशु और पक्षी बेहाल हैं। वहीं आवारा कुता ठंडक पाने के लिए नाली के पानी में पड़े रहते हैं.
शीतल पेय पदार्थों की मांग में उछाल
जेठ की इस भयंकर गर्मी ने बेल का शर्बत, सत्तू शर्बत, नींबू पानी, गन्ने का रस, तरबूज और खीरे की मांग बढ़ा दी है. बाजार में इन वस्तुओं की बिक्री में भारी उछाल आया है. दुकानदारों का कहना है कि सुबह 10 बजे से लेकर देर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. आइसक्रीम और ठंडे पेयों की दुकानें भी गुलजार हैं. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ पंकज कुमार ने कहा कि जेठ की गर्मी में लू लगना आम बात है. इससे बचने के लिए लोगों को धूप में बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए. शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नींबू पानी, नमक-चीनी का घोल और मौसमी फलों का सेवन करना जरूरी है.
