कर्मियों की मरजी पर खुलता है पीएचइडी कार्यालय का ताला

कुर्था (अरवल) : सरकार गांव-गांव तक निर्बाध बिजली आपूर्ति व पेयजल आपूर्ति के प्रति दृढ़ संकल्पित है. नतीजा आज बिजली के क्षेत्र में लगभग आत्मनिर्भरता की ओर है. वहीं पेयजल के लिए भी सरकार गांव की गलियों में पाइप लाइन बिछा रही है व जलमीनार लगा रही है. परंतु, कुर्था स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों […]

कुर्था (अरवल) : सरकार गांव-गांव तक निर्बाध बिजली आपूर्ति व पेयजल आपूर्ति के प्रति दृढ़ संकल्पित है. नतीजा आज बिजली के क्षेत्र में लगभग आत्मनिर्भरता की ओर है. वहीं पेयजल के लिए भी सरकार गांव की गलियों में पाइप लाइन बिछा रही है व जलमीनार लगा रही है.
परंतु, कुर्था स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों द्वारा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के कारण सरकारी योजनाएं कुप्रभावित हो रही हैं.
कुर्था पीएचइडी विभाग द्वारा वर्षो पूर्व यहां पाइप लाइन द्वारा वाटर सप्लाइ की योजना बनी थी. जलमीनार भी बनाये गये. परंतु, पाइप लाइन द्वारा वाटर सप्लाइ की ग्रामीणों की उम्मीदें आज तक पूरी नहीं हो सकी. लगभग 11.30 बजे संवाददाता जब कुर्था पीएचइडी विभाग के कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताला लटका पाया. उस समय तक न तो कोई कर्मचारी और न ही कोई अधिकारी कार्यालय पहुंचे थे.
कार्यालय के समीप कुछ बच्चे व एक बूढ़ी महिला बैठी थी. जब उनसे पूछा गया कि अधिकारी व कर्मचारी कब आते हैं, तब सभी ने चुप्पी साध ली. हालांकि बाद में दबी जुबान से कुछ लोगों ने बताया कि ‘उनकी अपनी मरजी चलती है, जब चाहें खोलें या बंद रखें. कौन देखने वाला है.’ उक्त विभाग में पांच कर्मचारी रामविलास यादव (खलासी), नरेंद्र प्रसाद (टीम चौकीदार), नरेश प्रसाद (मिस्त्री), मुन्नी लाल (खलासी), बैजनाथ प्रसाद (खलासी) व एक अधिकारी प्रकाश चंद्र प्रभाकर (कार्यपालक अभियंता) पदस्थापित हैं. इन लोगों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही से कुर्था वासियों की उम्मीदें टूट रही हैं. यहां के ग्रामीण वर्षो से पाइप लाइन द्वारा पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं.
परंतु, इस दिशा में विभाग द्वारा अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया. ग्रामीणों ने डीएम से पहल कर पाइप लाइन द्वारा जलापूर्ति की व्यवस्था को सुनिश्चित कराने की मांग की है. वहीं, जब संवाददाता ने कार्यपालक अभियंता से 11:30 तक कार्यालय बंद रहने के संबंध में पूछा, तो वे कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. ज्ञात हो कि रखरखाव के अभाव में विभाग की चहारदीवारी यत्र-तत्र धराशायी हो रहा है, लेकिन इस तरफ भी किसी का ध्यान नहीं है.

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