शाहपुर : 1857 के नायक वीर देवी ओझा की याद में बनेगा स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी, स्मारिका का हुआ विमोचन.

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा वीर देवी ओझा की स्मृतियों को सहेजने के लिए उनके पैतृक गांव सहजौली में स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी का शिलान्यास किया गया. इस अवसर पर उनकी वीरता पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन किया गया.

Arrah News : भोजपुर के शाहपुर प्रखंड स्थित सहजौली गांव में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा वीर देवी ओझा की स्मृतियों को संजोने की पहल शुरू की गई है. रविवार को उनके पैतृक गांव में वीर देवी ओझा स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया. इस विशेष अवसर पर वीर देवी ओझा के जीवन और देश के प्रति उनके योगदान पर आधारित एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया.

अंग्रेजी हुकूमत के छुड़ा दिए थे छक्के

मुख्य अतिथि पूर्व सांसद मीना सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वीर देवी ओझा जैसे महान क्रांतिकारी आज भी पूरे समाज के लिए बड़े प्रेरणास्रोत हैं. उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया.

अंग्रेजी हुकूमत उन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयास करती रही, लेकिन उनके युद्ध कौशल और बेहतरीन रणनीति के कारण कभी सफल नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि महारानी विक्टोरिया तक ने उन्हें मौत से भी भयावह सजा देने की घोषणा की थी. ऐसे वीर सपूत की स्मृतियों को सहेजने का कार्य कर रहा देवी ओझा मेमोरियल ट्रस्ट पूरी तरह बधाई का पात्र है.

स्मारिका का विमोचन और लाइब्रेरी का शिलान्यास

कार्यक्रम में पूर्व सांसद मीना सिंह, शिक्षाविद एम.के. मिश्रा, शंभू शरण मिश्रा, अधिवक्ता अश्विनी कुमार पांडे, नरेंद्र तिवारी तथा वीर देवी ओझा के वंशज देवकुमार ओझा ने संयुक्त रूप से स्मारिका का विमोचन किया.

इसके ठीक बाद स्मृतिद्वार एवं डिजिटल लाइब्रेरी निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया. स्थानीय विधायक राकेश रंजन ने कहा कि वीर देवी ओझा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में उनके साहस और संघर्ष ने अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी थी. ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीप कुमार ओझा ने बताया कि अगले कुछ महीनों में वीर देवी ओझा के जीवन, संघर्ष और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी.

नई पीढ़ी को योगदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता

शिक्षाविद एम.के. मिश्रा ने कहा कि नई पीढ़ी को वीर देवी ओझा के योगदान से परिचित कराना समय की बड़ी आवश्यकता है और इस दिशा में यह स्मारिका महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करना पूरे समाज के लिए गौरव की बात है. वहीं शंभू शरण मिश्रा, अधिवक्ता अश्विनी कुमार पांडे, नरेंद्र तिवारी और मुक्तेश्वर मिश्र उर्फ सरजी ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर देवी ओझा का नाम सुनकर अंग्रेजी सेना भी पूरी तरह भयभीत हो जाती थी. सहजौली मठिया में उनके नाम पर स्मृतिद्वार एवं डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.

समाज के विभिन्न गणमान्य लोग रहे उपस्थित

समाजसेवी हीरालाल ओझा ने कहा कि वीर देवी ओझा के संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है. कार्यक्रम को पैक्स अध्यक्ष कृष्णा यादव, चंचल ओझा, ऋषिकेश ओझा, उमेश चंद्र पांडे, विनय शंकर ओझा, श्याम सुंदर सिंह कुशवाहा, सुरेमन चौधरी, शैलेश चंद्रा, सत्यदेव राय एवं शिवप्रसन्न यादव ने भी संबोधित किया. इससे पूर्व, देवी ओझा मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से सभी आगंतुक अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया.

इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में ट्रस्ट के सचिव अभिनव ओझा, रामदेव तिवारी, गोलू ओझा, रामकुमार यादव, अंकित पांडे, पंकज तिवारी, पप्पू ओझा, अशोक शर्मा, शिवशंकर सिंह सहित बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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