Arrah News : आरा के कोईलवर नगर पंचायत की सबसे व्यस्त और हजारों लोगों की जिंदगी से जुड़ी मुख्य सड़क पिछले दो दशकों से बदहाली की कहानी बयां कर रही है. हालात इतने खराब हैं कि सड़क पर डेढ़ से दो फुट गहरे गड्ढे बन चुके हैं और लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को झेलनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है.
यह सड़क कोईलवर चौक से लेकर मियांचक, हनुमतधाम, चिकटोली, बाजार मुहल्ला, काजी मुहल्ला, आजाद कला मंदिर, बिहार डक फॉर्म, आरएएफ मुख्यालय होते हुए मानसिक अस्पताल के मुख्य द्वार तक जाती है. करीब दो किलोमीटर लंबी इस सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क.
आधी आबादी की जिंदगी पर असर
नगर के 14 वार्डों में से 7 वार्ड सीधे इस सड़क से जुड़े हुए हैं. वार्ड 02, 03, 05, 06, 07, 08 और 10 के लोग इसी रास्ते से होकर चौक-चौराहा, सब्जी बाजार, थाना, ब्लॉक, नगर कार्यालय, रेलवे स्टेशन और ऑटो स्टैंड तक पहुंचते हैं. लेकिन सड़क की बदहाली के कारण रोजमर्रा का सफर भी चुनौती बन गया है.
लगातार गड्ढों में गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
बरसात में हालात और खतरनाक
बारिश के मौसम में यह सड़क और भी खतरनाक हो जाती है. गड्ढों में पानी भर जाने से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कहां सड़क है और कहां गड्ढा. कई बार स्कूली बसें इन गड्ढों में फंसकर खराब हो चुकी हैं.
स्थिति ऐसी हो गई कि स्कूल बसों ने इस रास्ते से आना-जाना बंद कर दिया है. अब अभिभावकों को बच्चों को करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर कोईलवर चौक तक छोड़ने जाना पड़ता है, जहां से बच्चे बस पकड़ते हैं. इससे रोजाना की परेशानी और बढ़ गई है.
मरीजों और श्रद्धालुओं को भी भारी दिक्कत
इस सड़क पर कई मंदिर और दो मस्जिद स्थित हैं. स्थानीय लोग पूजा-अर्चना और इबादत के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन जलजमाव और कीचड़ के बीच होकर गुजरना उनकी मजबूरी बन गया है.
सबसे गंभीर स्थिति मरीजों की है. किसी इमरजेंसी में वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिसके कारण मरीजों को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. यह स्थिति क्षेत्र के स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है.
अधूरा निर्माण बना नई परेशानी
इस सड़क के पुनर्निर्माण को लेकर उम्मीद तब जगी जब स्थानीय विधायक की अनुशंसा पर ग्रामीण कार्य विभाग ने टेंडर जारी किया. इसके बाद शशि गैल्वनाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को निर्माण का कार्यादेश दिया गया.
लेकिन लोगों के अनुसार कार्यादेश मिलने के छह महीने बाद तक कोई काम शुरू नहीं हुआ. बाद में जब काम शुरू हुआ तो महज 600 से 700 मीटर हिस्से में ढलाई कर ठेकेदार काम छोड़कर गायब हो गया. धीरे-धीरे निर्माण स्थल से मशीन और सामग्री भी हटा ली गई.
अब अधूरी सड़क और बरसात ने मिलकर लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है. जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वह भी टूटती नजर आ रही है.
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर पूरा निर्माण हो गया होता, तो आज यह समस्या नहीं होती. अब लोग 200 से 300 मीटर की दूरी तय करने के लिए करीब 3 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
फिलहाल इलाके के लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं. अगर जल्द ही सड़क निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो लोगों का गुस्सा और बढ़ सकता है. यह सड़क अब सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट बन चुकी है.
