आरा में चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था, सात में छह ट्रैफिक टावर टूटे, जाम से जूझ रहे शहरवासी

आरा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. देखरेख के अभाव में सात ट्रैफिक टावरों में से छह ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे शहर में लगातार भीषण जाम लग रहा है. प्रशिक्षित सिपाहियों की कमी और संसाधनों के अभाव ने समस्या को और बढ़ा दिया है.

नगर में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बनाए गए ट्रैफिक टावर देखरेख के अभाव में एक-एक कर टूट रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ट्रैफिक टावरों के जर्जर होने और सिग्नलों के काम न करने से शहर में प्रतिदिन भीषण जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

नगर में बनाए गए थे कुल सात ट्रैफिक टावर, छह हो चुके हैं ज़मींदोज

यातायात नियंत्रण के लिए नगर के प्रमुख चौराहों पर कुल सात ट्रैफिक टावर बनाए गए थे, जिनमें से छह टावर पूरी तरह टूट कर ध्वस्त हो चुके हैं.

वर्तमान में केवल प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आवास के समीप स्थित एक ही ट्रैफिक टावर बचा हुआ है, लेकिन वह भी देखरेख के अभाव में कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है और कभी भी पूरी तरह बेकार हो सकता है.

सुचारू यातायात के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं ट्रैफिक टावर

शहर की सुचारू यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक टावर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनके माध्यम से ऊंचाई पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी दूर से ही गाड़ियों की आवाजाही पर नजर रखते हैं और यातायात को नियंत्रित करते हैं, जिससे जाम की नौबत नहीं आती.

इतनी महत्वपूर्ण व्यवस्था के ध्वस्त होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इसे ठीक कराने की कोई पहल नहीं की जा रही है.

प्रशिक्षित सिपाहियों का अकाल, होमगार्ड के भरोसे यातायात

आरा शहर में ट्रैफिक पुलिस के पास प्रशिक्षित सिपाहियों की भारी कमी है. पूरी यातायात व्यवस्था का बोझ होमगार्ड के जवानों के कंधों पर टिका हुआ है, जिसके कारण ट्रैफिक की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी रहती है.

चौराहों पर सही तरीके से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती न होने का फायदा उठाकर बाइक और चारपहिया वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते हैं, जो रोज़ाना लगने वाले जाम की मुख्य वजह बनता है.

संसाधनों की कमी से पस्त है ट्रैफिक पुलिस, शाम होते ही सड़कों से गायब जवान

ट्रैफिक पुलिस के पास बुनियादी संसाधनों का भी भारी अभाव है. कुछ वर्ष पूर्व तक जवान रात 8 बजे तक चौराहों पर मुस्तैद रहते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था समाप्त हो गई. अब स्थिति यह है कि शाम होते ही प्रमुख चौक-चौराहों से ट्रैफिक जवान गायब हो जाते हैं.

जवानों के पास गाड़ियों को संकेत देने के लिए ट्रैफिक स्टिक तक उपलब्ध नहीं है. पहले हरे, पीले और लाल रंग की ट्रैफिक स्टिक से यातायात काफी हद तक नियंत्रित रहता था.

नगरवासियों का कहना है कि जिला व नगर प्रशासन को तुरंत ध्यान देकर ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए ताकि लोगों को रोज़-रोज़ के जाम से राहत मिल सके.

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By Narendra Prasad Sin

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