Arrah Adulteration Sweets : रक्षाबंधन को लेकर आरा समेत पूरे जिले में मिठाइयों की खरीदारी बढ़ने लगी है. त्योहार के दौरान बड़ी मात्रा में मिठाई की बिक्री होती है, ऐसे में मिलावट को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ रही है. स्थानीय स्तर पर मिठाई दुकानों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी का कहना है कि मिठाइयों के सैंपल लिये जाते हैं और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाती है. विभाग ने तकनीकी और प्रयोगशाला संबंधी परेशानियों का भी जिक्र किया है.
राखी के बाजार में बढ़ी मिठाइयों की मांग
रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर त्योहार मनाते हैं. इस वजह से त्योहार के आसपास मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है. जिले में हर वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार मिठाइयां खरीदते हैं. इसी बढ़ी मांग के बीच मिठाइयों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
हजारों दुकानों पर बिकती हैं अलग-अलग मिठाइयां
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरा शहर और जिले में बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी मिठाई की दुकानें हैं. एक स्थान पर 3000 से अधिक दुकानों का उल्लेख किया गया है, जबकि खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के अनुसार जिले में 4000 से अधिक मिठाई दुकानदार हैं. इनमें करीब 700 दुकानदारों का निबंधन या लाइसेंस होने की बात कही गयी है.
त्योहार पर जांच को लेकर उठ रहे सवाल
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है. ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नियमित जांच और सैंपलिंग को महत्वपूर्ण माना जाता है. लोगों का कहना है कि दुकानों पर बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता की जांच प्रभावी तरीके से होनी चाहिए, ताकि मिलावट की स्थिति में कार्रवाई की जा सके.
मिठाइयों में मिलावट को लेकर क्या दावे हैं
मिलावट को लेकर सामने आई जानकारी में काजू बर्फी, पनीर और खोवा जैसी मिठाई बनाने वाली सामग्री का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि लागत कम करने के लिए कुछ जगहों पर घटिया या वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, किसी दुकान या उत्पाद के बारे में मिलावट की पुष्टि केवल आधिकारिक जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट से ही मानी जानी चाहिए.
काजू बर्फी में सिल्वर वर्क की जगह दूसरे पदार्थ का सवाल
काजू बर्फी पर लगने वाले वर्क को लेकर भी सावधानी जरूरी है. खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाला वर्क ही सुरक्षित माना जाता है. किसी वर्क की गुणवत्ता केवल देखकर तय नहीं की जा सकती. इसलिए संदिग्ध मिठाई की वैज्ञानिक जांच अधिक विश्वसनीय तरीका है.
खोवा और पनीर की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण
त्योहार के दौरान खोवा और पनीर की मांग बढ़ जाती है. उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि लागत कम करने के लिए कुछ कारोबारी खोवा में शकरकंद, आलू या अरारोट जैसी सामग्री मिला सकते हैं. इसी तरह पनीर की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते हैं. हालांकि, ऐसी मिलावट की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी है.
घर पर किए जाने वाले टेस्ट को लेकर सावधानी जरूरी
मिठाई या पनीर की शुद्धता जांचने के लिए बाजार में कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं. लेकिन केवल ऐसे घरेलू परीक्षण के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को नकली या मिलावटी घोषित करना उचित नहीं है. खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और मिलावट की अंतिम पुष्टि मान्य वैज्ञानिक जांच से ही होनी चाहिए.
मिलावटी खाद्य पदार्थ से स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
खाद्य सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. लगातार या अधिक मात्रा में दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर के विभिन्न अंगों पर असर डाल सकता है. इसलिए त्योहार के दौरान साफ-सुथरी और भरोसेमंद दुकान से मिठाई खरीदना जरूरी है.
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बतायी विभाग की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के अनुसार, विभाग की ओर से मिठाइयों के सैंपल लिये जाते हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा जाता है. जांच में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है. उन्होंने लगातार जांच किये जाने की बात कही है.
प्रयोगशाला और तकनीकी कारणों से जांच में देरी
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बताया कि लीगल जांच के लिए प्रयोगशाला में सरकार की ओर से राशि निर्धारित की जाती है. राशि स्वीकृत होने में कुछ समय लगने और तकनीकी कारणों से प्रक्रिया में देरी की बात उन्होंने कही. प्रयोगशाला में कर्मियों की कमी से भी परेशानी होने की जानकारी दी गयी. अधिकारी ने उम्मीद जतायी कि जल्द व्यवस्था सामान्य हो जाएगी.
