आरा की बड़ी मठिया में श्रीकृष्ण छठीहार महोत्सव, सोहर-बधाई गीतों पर झूमे श्रद्धालु

Arrah Shri Krishna Chhathihar Festival : आरा के श्री हनुमान मंदिर, बड़ी मठिया में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छठीहार महोत्सव का आयोजन हुआ. मंगलामुखियों के सोहर, बधाई गीतों और युवा कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांधा.

Arrah Shri Krishna Chhathihar Festival : आरा शहर के प्रसिद्ध श्री हनुमान मंदिर, बड़ी मठिया के प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भव्य श्रीकृष्ण छठीहार महोत्सव का आयोजन किया गया. धार्मिक आस्था, लोक-संस्कृति और संगीत के इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए. शाम पांच बजे शुरू हुआ कार्यक्रम देर रात 12 बजे तक चलता रहा. मंदिर परिसर को विद्युत सज्जा और फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था.

संतों के मंगलानुशासन में हुआ आयोजन

महोत्सव का आयोजन पूज्य श्री जीयर स्वामी जी महाराज के प्रधान शिष्य पूज्य स्वामी अयोध्यानाथ जी के मंगलानुशासन तथा श्री रामकिंकर दास जी महाराज की अध्यक्षता में हुआ. आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला.

श्रीकृष्ण छठीहार महोत्सव

सोहर और बधाई गीतों ने बांधा समां

महोत्सव का मुख्य आकर्षण मंगलामुखियों की ओर से प्रस्तुत पारंपरिक सोहर और बधाई गीत रहे. संगीत के साथ आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा. वहीं युवा कलाकारों ने भक्ति गीतों और लोकधुनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए.

अयोध्यानाथ स्वामी ने दिया प्रेम और सद्भाव का संदेश

सत्संग और आशीर्वचन के दौरान पूज्य अयोध्यानाथ स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संपूर्ण मानव समाज को सत्य, धर्म, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए. ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं.

महाप्रसाद के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कार्यक्रम के समापन पर महाप्रसाद का वितरण किया गया. हजारों भक्तों ने श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया. आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों की ओर से व्यापक प्रबंध किए गए थे.

धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की झलक

बड़ी मठिया में आयोजित श्रीकृष्ण छठीहार महोत्सव में धार्मिक परंपरा के साथ लोक संस्कृति और संगीत का भी संगम देखने को मिला. सोहर और बधाई गीतों ने आयोजन को विशेष रंग दिया. देर रात तक मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा.

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By आशुतोष पांडेय

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