Shankar Kumar Singh : आरा के बड़हरा प्रखंड के पड़रिया गांव निवासी शिक्षाविद् शंकर कुमार सिंह की जिंदगी संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी है. बचपन में पोलियो की चुनौती का सामना करने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना लक्ष्य बनाया और ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षण संस्थान खड़े किए. शिक्षा और समाज सेवा में उनके योगदान को देखते हुए शुक्रवार को भारत मंच, भोजपुर की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया.
बचपन की चुनौती को बनाया अपनी ताकत
बड़हरा प्रखंड के पड़रिया गांव निवासी शिक्षाविद् शंकर कुमार सिंह को शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया. बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ते रहे.
भारत मंच भोजपुर ने किया सम्मानित
बड़हरा स्थित आरके इंटरनेशनल विद्यालय में शुक्रवार को सम्मान समारोह आयोजित किया गया. इसमें भारत मंच, भोजपुर की ओर से शंकर कुमार सिंह को अंगवस्त्र और सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत सिंह, जिलाध्यक्ष राजेश दत्त तिवारी, संतोष सिंह संटू और भाजपा अति पिछड़ा मोर्चा के जिला महामंत्री रंजीत कुमार मौजूद रहे.
गणित से पढ़ाई शुरू की और शिक्षा को बनाया मिशन
शंकर कुमार सिंह ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से गणित ऑनर्स के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कॉन्सेप्ट क्लासेस और आरके इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की.
ग्रामीण बच्चों के लिए खड़े किए शिक्षण संस्थान
शंकर कुमार सिंह के संस्थानों में ग्रामीण क्षेत्र के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. यहां आधुनिक शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई का अवसर दिया जा रहा है. ग्रामीण इलाके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उनके प्रयास की समारोह में मौजूद लोगों ने सराहना की.
पोलियो के बावजूद नहीं छोड़ा संघर्ष
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शंकर कुमार सिंह का जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और समाज के प्रति समर्पण की मिसाल है. बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने अपनी परिस्थितियों को सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया और शिक्षा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया.
दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता की मिसाल बने
भारत मंच के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत सिंह ने कहा कि शंकर कुमार सिंह ने अपने संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से साबित किया है कि शारीरिक दिव्यांगता किसी व्यक्ति की सफलता में बाधा नहीं बन सकती. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया.
ग्रामीण शिक्षा को लेकर प्रयास की सराहना
भारत मंच के जिलाध्यक्ष राजेश दत्त तिवारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर शंकर कुमार सिंह नई पीढ़ी का भविष्य संवारने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षाविदों का सम्मान पूरे समाज के लिए गौरव की बात है.
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया
संतोष सिंह संटू ने कहा कि शंकर कुमार सिंह का संघर्ष से सफलता तक का सफर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है.
दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बनने दिया
भाजपा अति पिछड़ा मोर्चा के जिला महामंत्री रंजीत कुमार ने कहा कि शंकर कुमार सिंह ने दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने संघर्ष, आत्मविश्वास और सेवा की भावना के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है.
शिक्षा के जरिए बदलाव लाने की कोशिश
समारोह में मौजूद लोगों ने शंकर कुमार सिंह के कार्यों की सराहना की. लोगों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने का उनका प्रयास विद्यार्थियों और समाज को नई दिशा देने का काम कर रहा है.
Also Read : आरा के इस गांव में 11 पक्के मकान पर चला बुलडोजर, 18 महीने पुराने आदेश पर कार्रवाई, बारिश में बेघर हुए परिवार
