बिहार पंचायत सेवा संघ ने खोला मोर्चा: बीपीआरओ को राजपत्रित घोषित करने समेत 9 मांगों पर आंदोलन, सामूहिक अवकाश की चेतावनी

बिहार के प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) ने अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर राज्यव्यापी सांकेतिक विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने राजपत्रित दर्जा, वेतन वृद्धि और वित्तीय अधिकार जैसी मांगों पर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद जताई है.

Arrah News: बिहार पंचायत सेवा संघ के आह्वान पर राज्यभर के प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों (बीपीआरओ) ने 14 और 15 सितंबर को अपनी बांह पर काला बिल्ला लगाकर सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज कराया. संघ ने पंचायती राज विभाग से वर्षों से लंबित अपनी नौ सूत्री मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है. संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

लगातार उपेक्षा का आरोप

संघ के अनुसार, पिछले कई वर्षों से विभाग को मांग पत्र और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी क्रम में 8 सितंबर को भी विभाग को नया ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद 9 सितंबर को पटना में राज्य कार्यकारिणी की बैठक आयोजित कर संघर्ष समिति का गठन किया गया.

बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप अधिकारों की मांग

संघ का कहना है कि वर्ष 2010 में बिहार पंचायत सेवा संवर्ग के गठन के बाद से पंचायती राज पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ चुकी हैं, लेकिन उस अनुपात में उन्हें प्रशासनिक अधिकार और संसाधन नहीं दिए गए हैं. संघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • राजपत्रित दर्जा: बीपीआरओ पद को अविलंब राजपत्रित घोषित किया जाए और उन्हें पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी बनाया जाए.
  • वेतन विसंगति व प्रोन्नति: वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए पहली प्रोन्नति लेवल-7 से बढ़ाकर लेवल-9 की जाए तथा कैडर का न्यायसंगत पुनर्गठन कर लंबित प्रोन्नतियां शीघ्र दी जाएं.
  • वित्तीय अधिकार: बीपीआरओ को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) की शक्तियां प्रदान की जाएं.
  • संसाधन एवं पद सृजन: एसीईओ व एडीपीआरओ को क्षेत्र भ्रमण के लिए राजकीय वाहन उपलब्ध कराने की नियमावली बने. साथ ही प्रखंड कार्यालयों में लिपिक, नाजिर और अनुसेवक के नए पद सृजित कर कार्यालय संचालन के लिए अलग बजट तय हो.

सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी

संघ ने साफ किया है कि दो दिनों के सांकेतिक विरोध के बाद भी यदि सरकार ने वार्ता की पहल नहीं की, तो राज्यभर के सभी बीपीआरओ सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे. संघ ने सरकार से अपील की है कि वार्ता के जरिए इन मांगों का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि ग्रामीण विकास और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों.

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By दीपक कुमार गुप्ता

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